एल्कोहल और खाद्य सामग्रियों में मिले केमिकल लीवर के लिए घातक हैं। कैंसर में प्रयोग होने वाली दवाओं से सबसे अधिक लीवर प्रभावित होता है। प्रतिदिन एक फिजीशियन की ओपीडी में लगभग 10 मरीज लीवर के पहुंचते हैं। कुमाऊं में लीवर के सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक नहीं हैं।
लीवर हमारे शरीर में पाचन का काम करता है। कोई भी खाद्य सामग्री या दवाएं सीधे लीवर में पहुंचने के बाद ही आगे जाती हैं। बहुत अधिक पेन किलर के प्रयोग से भी लीवर खराब होने का डर रहता है। मिलावटी खाद्य सामग्री में पड़े केमिकल भी लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। लीवर को टॉक्सिन से भी नुकसान होता है। लीवर खराब होने पर डाक्टर दवाएं भी बहुत सावधानी से देते हैं। लीवर के लिए सबसे अधिक खतरनाक एल्कोहल (शराब) है। घी, तेल और चिकनाई भी लीवर को नुकसान पहुंचाता है।
मिलावटी खाद्य पदार्थ के कारण ही लोगों का एसजीओटी एवं एसजीपीटी बढ़ा रहता है। लीवर संबंधी रोगियों की अगर बात की जाए तो एक फिजीशियन की ओपीडी (70 से 80 मरीज प्रतिदिन) में लगभग 10 मरीज लीवर के होते हैं। जबकि लेप्रोस्कोपी एवं गैस्ट्रो सर्जन के पास लीवर संबंधी मरीज अधिक आते हैं। लीवर के बढ़ते रोगियों के बावजूद कुमाऊं में कोई सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक नहीं है।
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व्यस्कों में फैटी लीवर की शिकायत अधिक आ रही है। लीवर को बचाने के लिए दवाओं का प्रयोग कम से कम करें, पेन किलर से दूर रहने के साथ ही व्यायाम करें। मिलावटी और अधिक घी-तेल वाले भोजन से बचें।
डा. नीलांबर भट्ट
वरिष्ठ फिजीशियन/आईएमए अध्यक्ष हल्द्वानी