उत्तराखंड में पहली बार लिसुरस गार्डनेरी मशरूम मिलने पर वन विभाग इसे पूरे राज्य में तलाशेगा। यह प्रजाति भारत सहित एशिया और अफ्रीका में पाई जाती है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसके फोटोग्राफिक साक्ष्य दूसरों के पास नहीं है। विश्व के प्रसिद्ध फोटोग्राफर इस उपलब्धि के बाद बाद आश्चर्यचकित हैं।
वन शिक्षक टीम के सदस्य मनोज सिंह ने चमोली जिले के घने देवदार के जंगल से इसका नमूना एकत्र किया है। विश्व के प्रसिद्ध फोटोग्राफ टेलर लॉकवुड इससे आश्चर्यचकित हैं। उन्होंने आगे के अध्ययन के लिए उनसे इसका नमूना मांगा है। लॉकवुड ने वर्ष 2013 में चीन में इस आकर्षक स्टिंकहॉर्न की तस्वीर खींची थी। तब से इसे दुनिया के किसी अन्य क्षेत्र में एकत्र नहीं किया गया था। अनुसंधान टीमों के पास इस अनोखे मशरूम के फोटोग्राफिक साक्ष्य और नमूने दोनों हैं जो लोगों को नमूने का अध्ययन करने और इसमें छिपे तथ्यों को जानने की अनुमति दे सकते हैं।
चार से छह भुजाओं से बना होता है
मशरूम की पारिस्थितिकी सैप्रोबिक है जो विभिन्न आवासों में अकेले या सामूहिक रूप से बढ़ती है। यह श्रीलंका, इंडोनेशिया, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका और कांगो में पाई जाती है। लिसुरस गार्डनेरी की भुजाएं शीर्ष पर जुड़ी हुई हैं और कभी मुक्त नहीं होती हैं। लिसुरस गार्डनेरी की पहचान इसकी भुजाओं की उपजाऊ सतह से की जा सकती है जो दिखने में काफी झबरा होती हैं और केवल बांह के ऊपरी हिस्से को ढकती है। इससे आधार खुला रह जाता है। भुजाएं भी आमतौर पर शीर्ष पर एकसाथ जुड़ी होती हैं।