हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना का काम तेज गति से चल रहा है। अब बांध निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे को निस्तारित करने के लिए जमीन तलाशी गई है। इस जमीन को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से हरी झंडी मिलनी है। पीसीबी के निरीक्षण के बाद मलबा निस्तारित करने के लिए परियोजना इकाई को भूमि भी उपलब्ध हो जाएगी।
जमरानी बांध परियोजना इकाई के उपमहाप्रबंधक बीबी पांडेय ने बताया कि बांध निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में मलबा निकलेगा। मलबा निस्तारित करने के लिए आबादी, नदी नालों, गौचर, पनघट से दूर निर्जन स्थल पर जमीन की जरूरत पड़ती है ताकि इससे आम जन और जानवरों को कोई दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि मलबा निस्तारित करने के लिए भौर्सा गांव में तीन हेक्टेयर के छोटे-छोटे तीन स्थलों का चयन किया गया है। इनमें से सबसे बड़ा पेच राजस्व का है, इसमें कुछ जमीन ग्रामीणों की भी है। यह पूरी जमीन बंजर है। प्रशासन ने जमीन के चिह्नीकरण के लिए वन, खनन, जमरानी परियोजना इकाई और भू वैज्ञानिक की टीम बनाई है।
टीम ने भूमि का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिपोर्ट भेजकर आख्या मांगी है। अगले हफ्ते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की ओर से निरीक्षण किया जाना है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद मलबा निस्तारण (मक डिस्पोजल) के लिए जमीन का मामला हल हो जाएगा। माई सिटी रिपोर्टर