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क्ये त्यार क्ये वार सब मोहनक दगड़ न्हैगो

Sun, 21 Aug 2016 11:49 PM IST
राजेश नेगी लालकुआं(नैनीताल)।
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मोहननाथ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्ये त्यार क्ये वार सब मोहनक दगड़ न्हैगो। कब होली आल कब दिवाली न्हैगे के पत्त न चलन। बस अब कसीक आपण च्यलक पास न्है जूं इजा बस योई चानूं। (तीज-त्योहार सब मोहन के साथ चले गए। कब होली आई, कब दिवाली आई पता नहीं। अब किसी तरह बेटे के पास चली जाऊं, यही मेरी इच्छा है।) यह दर्द है जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा क्षेत्र में 10 आतंकियों को मौत के घाट उतारने वाले अशोक चक्र से सम्मानित शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की मां राधिका का।  
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बूढ़ी हो चुकी शहीद की मां से पूछा- कुछ खाती पीती हो या नहीं, अपने शरीर से खिलवाड़ क्यों कर रही हो? इस पर मां राधिका का कहना था कि उसे न तो अब भूख प्यास लगती है और न ही कोई तीज त्योहार ही याद रहता है। हर पल उसके आगे बस मोहन का चेहरा ही दिखाई देता है। जवान बेटे को खोने का गम मां ही जान सकती है। राधिका की लड़खड़ाती आवाज से इस दर्द को समझा जा सकता था। 

देश से हो आतंकवाद का सफाया: भावना
शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की वीरांगना भावना का कहना है कि मुझे अपने पति से बिछड़ने का गम है तो उनकी शहादत पर गर्व भी। बस चिंता है तो आतंकवाद से। इच्छा यही है कि देश से आतंकवाद का सफाया हो। आतंकवाद ने हमारे देश के कई सैनिकों और नागरिकों का खून बहाया है।
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अब समय आ गया है कि खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाए, ताकि कोई भी दुश्मन भारत माता की सरहद की ओर आंख उठाने की हिम्मत न कर सके। वह कहती हैं कि 2400 फीट की ऊंचाई पर जाकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का सैनिकों को राखी बांधना प्रत्येक सैन्य परिवार का सम्मान है।  

आर्मी में डॉक्टर बनना चाहती है शहीद की बेटी भूमिका
शहीद मोहन नाथ की लाडली भूमिका की तमन्ना आर्मी में मेडिकल आफिसर बनने की है। नन्ही भूमिका के अंदर भी अपने पिता की भांति देश सेवा का जज्बा है। वह कहती है कि उसके पापा का सपना उसे डॉक्टर बनाना था और वह भी डॉक्टर बनना चाहती है। भूमिका का कहना है कि आर्मी में डॉक्टर बनकर वह अपने पिता के सपनों को साकार करेगी।

शहादत के एक वर्ष बाद भी घोषणाएं अधूूरी  
लालकुआं(नैनीताल)। राज्य सरकार की ओर से सालभर पहले कई घोषणाएं की गई थीं। जो घोषणाएं की र्गइं, उनमें शहीद के नाम पर मिनी स्टेडियम का निर्माण, उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना, एनएच का नाम शहीद के नाम पर रखना, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना आदि शामिल थीं। अब तक मात्र शहीद द्वार के निर्माण की घोषणा ही पूरी हो पाई है, वह भी गुणवत्ता के मानकों की कमी को लेकर विवादों में आ गई। 
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मोहन नाथ की शहादत को सलाम  
- मूल रूप से कोहिना गरुड़ (बागेश्वर) निवासी।
- 2002 में सेना की एलीट पैरा कमांडो में ज्वाइनिंग।
- 03 सितंबर 2015 को हंदवाड़ा (कुपवाड़ा) में शहीद।
- जम्मू कश्मीर में आतंक विरोधी बड़े अभियानों में लिया हिस्सा।
- शहीद होने से पूर्व ग्यारह दिनों में मार गिराए थे 10 आतंकी।
- पंचांग के अनुसार रविवार (21 अगस्त, 2016) को मनाई गई प्रथम पुण्यतिथि।
 
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