प्रो. नंद गोपाल साहू ने कहा यह समझौता अनुसंधान सुविधाओं और प्रयोगशालाओं के पारस्परिक उपयोग की भी वकालत करता है। जिससे दोनों संस्थानों के शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक उपकरणों और संसाधनों तक पहुंच प्राप्त हो सके। कहा कि यह समझौता सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित करता है। दोनों संस्थानों के विद्वानों और शोधकर्ताओं को नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी में अत्याधुनिक अनुसंधान पर एक साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
प्रो. साहू ने कहा कि केआईएसटी के साथ यह साझेदारी वैश्विक शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे निस्संदेह दोनों संस्थानों के शैक्षणिक समुदाय को लाभ पहुंचेगा। केआईएसटी के डॉ. वाईसी जंग ने कहा कि कुमाऊं विवि के साथ सहयोग अनुसंधान और अकादमिक साझेदारी के लिए नए रास्ते खुले हैं। इस अवसर पर कुलसचिव दिनेश चंद्रा, उप कुलसिचव दुर्गेश डिमरी, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. संतोष कुमार, विज्ञान संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. चित्रा पांडे, उप निदेशक डॉ. मोहन लाल, डॉ. महेश आर्य, डॉ. दीपक कुमार आर्य आदि ने हर्ष व्यक्त की है।
यह करार अकादमिक प्रतिभा को बढ़ावा देने, सास्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच अनुसंधान गठबंधन स्थापित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। यह निर्णय वैश्विक शिक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। - प्रो. डीएस रावत, कुलपति कुमाऊं विवि