कमलुवागांजा आज भी विकास की दौड़ में सालों पीछे है। गांव वाले बुनियादी सुविधाओं के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। गैस और पानी इलाके की सबसे बड़ी समस्या है। 24 घंटे में एक घंटा नलों में पानी आता है। नहाने और कपड़े धोने से लेकर मवेशियों के लिए गूल के पानी पर निर्भरता हैं। गांव की सड़कों की हालत खराब है। जंगली जानवरों के आतंक से गन्ने की बुआई छूट गई है। नहरें सूखने के बाद बची खेतीबाड़ी भी बंदर और सुअरों ने चौपट कर दी है।
कमलुवागांजा मेहता ग्राम पंचायत की आबादी 5000 के करीब है। देहाती हल्द्वानी के बाकी गांवों की तरह इस गांव का अस्तित्व भी धीरे धीरे खत्म होकर कंक्रीट के जंगलों में बदल रहा है। जगह-जगह कालोनियां कट रही हैं। बावजूद लंबे चौड़े खेत खलियान और घर के आंगन में बंधे जानवर गांव का एहसास कराते हैं। गांव से शहर में तब्दील हो रहे कमलुवागांजा इलाके का विकास प्रापर्टी डीलरों पर निर्भर है। प्रापर्टी डीलर ही प्लाट काटने के साथ कच्ची सड़कें, बिजली के तार और पेयजल की लाइनें खिंचवा रहे हैं। बाकी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को विकास से कोई लेना देना नहीं है।