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सुरेंद्र ने छत पर बनाया फलों का बाग

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किच्छा। इंसान अपनी मेहनत व लगन से सब कुछ कर सकता है। यह साबित किया है पंजाबी मुहल्ले निवासी सुरेंद्र फुटेला ने। सुरेंद्र के 175 गज के घर पर जब कोई बाहरी व्यक्ति गमलों में लगे आम, अमरूद, अनार और अंगूर के गुच्छे देखता है, तो बस देखता ही रह जाता है। उनका कहना है कि आजकल उनका सारा समय छत पर बने बाग की सेवा में कब बीत जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता।
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मूल रूप से ग्राम आजादनगर निवासी सुरेंद्र को यह शौक अपनी मां स्व. समित्रा देवी से विरासत में मिला है। सुरेंद्र ने बताया कि जब वह गांव में थे उनके घर के अमरूद और अनार बेहद मशहूर थे। शहर आने के बाद जब जमीन कम पड़ी तो उसने अपनी छत पर गमलों में ही जमीन तैयार कर ली। आज उसकी छत पर आम, संतरा, नींबू, अमरूद, अंगूर के अलावा छोटे छोटे गमलों में टमाटर आदि उगे हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका समय अपने छत पर बने बाग में ही बीतता है। इस काम में उनकी पत्नी और बच्चे भी मदद करते हैं।
पौधों की होनी चाहिए नियमित सेवा
सुरेंद्र ने बताया कि जिस तरह इंसान को अपना पेट भरने के लिए रोटी चाहिये, उसी तरह फल व फूल के पौधों को भी खाद और पानी चाहिए। पौधों की नियमित रूप से सेवा होनी चाहिए। बताया कि अपने गमलों के लिए वह गांव से गोबर की खाद ले आते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी छतों पर इस तरह के प्रयोग जरूर करने चाहिए। इससे मानसिक विकास के साथ साथ शारीरिक विकास भी होता है।
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