पुलिस जिस खत को सुसाइड नोट समझ रही है वह सराफा व्यवसायी ने कुछ दिनों पहले बालाजी मंदिर में अर्जी लगाने के लिए लिखा था। ऐसा कहना है कि व्यवसायी की पत्नी पूजा का। परिवार के लोग यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि कर्ज के चलते व्यवसायी ने आत्महत्या की है, बल्कि दबाव के चलते किसी ने उसकी हत्या की है। बहरहाल व्यवसायी की मौत अपने पीछे कई गंभीर सवालों को छोड़ गई है।
व्यवसायी के ताऊ के पुत्र प्रवीण और भांजे शुभम का कहना है कि घनश्याम दुआ की कमाई इतनी थी कि वह लाखों का कर्ज आराम से चुकता कर सकता था। उसे आत्महत्या करने की नौबत नहीं थी। यदि आत्महत्या करने का इरादा होता तो वह घर या दुकान में कर सकता था। उसे गौला पुल-चोरगलिया रोड से एक किलोमीटर दूर झाड़ी में जाने की क्या जरूरत थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुमशुदगी दर्ज कराने के कुछ देर बाद पुलिस ने सोनू से डेढ़ घंटे पूछताछ की। इसके बाद गौलापुल के नीचे का लोकेशन मिल गया।
पुलिस के मुताबिक सोनू दो दिन पहले उसे गौला पुल से पकड़कर लाया था। सवाल यह है कि सोनू व्यवसायी घनश्याम का किसलिए पीछा कर रहा था। उसने परिवार या मित्रों को क्यों नहीं सूचना दी। दोनों ने बताया कि व्यवसायी की पत्नी पूजा का कहना है कि घनश्याम ने बालाजी मंदिर में अरदास लगाने के लिए चिट लिखा था। पुलिस इसी अर्जी को सुसाइड नोट साबित करने में लगी है। पुलिस को यह जांच करना होगा कि आखिर किसके दबाव में व्यवसायी जंगल में गया। पत्थर के नीचे शव कैसे मिला। उसका चश्मा कैसे टूटा था। परिजनों को डाक्टर से जानकारी मिली है कि घनश्याम ने बुधवार रात 11 बजे दम तोड़ा था। आखिर दोपहर बाद वह कहां-कहां गया था। पोस्टमार्टम के बाद डाक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है। पत्नी का कहना है कि 9 सितंबर 2012 को घनश्याम के पिता की मौत हुई थी, इसके बाद से वह काफी परेशान था।