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गंगोत्री, यमुनोत्री ग्लेशियर, बुग्याल, वेटलैंड, जंगल को भी जीवित व्यक्ति का दर्जा

Sat, 01 Apr 2017 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।  
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गंगा - फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। शुक्रवार को हाइकोर्ट ने प्रदेश के गंगोत्री, यमुनोत्री, ग्लेशियरों, झील, झरनों, घास के मैदान आदि को भी जीवित व्यक्ति (ज्यूरिस्टिक पर्सन) घोषित किया। पूर्व में कोर्ट ने ललित मिगलानी की याचिका पर गंगा और यमुना नदी को कोर्ट ने यह दर्जा दिया था।
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ललित मिगलानी की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र ही कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव सचिव सहित छह लोगों को अभिभावक नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के ग्लेशियरों, वेटलैंड, घास के मैदान आदि को भी संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों के समान अधिकार प्राप्त होंगे। 

 वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री सहित अन्य ग्लेशियरों, नदियों, जलधाराओं, जंगल, जलप्रपातों, झीलों, हवा, झरने, स्रोत, घास के मैदान आदि को वही अधिकार होंगे, जो एक जीवित व्यक्ति के होते हैं।
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उन्हें क्षति पहुंचाने पर उसी प्रकार का ट्रीटमेंट किया जाएगा, जो एक मानव को क्षति पहुंचाने पर किया जाना है। कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव, निदेशक नमामी गंगे, गंगा स्वच्छता राष्ट्रीय मिशन के निदेशक ईश्वर सिंह, एकेडमिक निदेशक चंडीगढ़ ज्यूडिशियल एकेडमिक डा. बलराम गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट एमसी मेहता तथा एडवोकेट जनरल उत्तराखंड को अभिभावक का दर्जा दिया है।

कोर्ट ने कहा कि इनके माध्यम से ग्लेशियरों सहित अन्यों की क्षति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदेश के मुख्य सचिव प्रदेश के शहरों और कस्बों से सात प्रतिनिधियों को अभिभावकों में शामिल कर सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि लोगों का दायित्व है कि वे पर्यावरण, वृक्षों, नालों, झीलों हवा की रक्षा करें। कोर्ट ने यह निर्णय पूर्व में नदियों को संरक्षित करने संबंधित फैसले के याचिकाकर्ता ललित मिगलानी के प्रार्थना पर दिया। कोर्ट ने दो दिसंबर, 2017 के आदेश में कहा था कि इस मामले का स्टेटस लाइव रखा जा रहा है, ताकि नए आदेश पारित किए जा सके। 

नैनीताल। हाइकोर्ट ने पूर्व में अपने निर्णय में कहा था कि हरिद्वार में भिखारी नहीं होने चाहिए , लेकिन कोर्ट को बताया गया था कि वहां पर अभी भी भिखारी हैं। इस पर कोर्ट ने डीएम हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि वहां पर भिखारी नहीं होने चाहिए।

कोर्ट ने दो दिसंबर के निर्णय के क्रम में कहा कि होटल, आश्रम व कोई भी अन्य प्रतिष्ठान के सीवर का पानी गंगा में जाता है तो उसे तत्काल सील किया जाए। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आदेश के बावजूद उसे सील क्यों नहीं किया गया। 

डायरेक्टर नेशनल मिशन प्रवीण कुमार ने कोर्ट को बताया था कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 662 रुपए रिलीज किए जा चुके हैं और कोर्ट के निर्णय के बाद  दो सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त जारी कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 18  शवदाह गृह का निर्माण प्रारंभ हो चुका और 10 में टेंडर की प्रक्रिया चल रही  है और 40 अन्य पर कार्यवाही की जानी है। कोर्ट ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को आठ सप्ताह के भीतर पूरा करें और अन्य 40 शवदाह का निर्माण तीन माह के भीतर पूर्ण करें। 

कोर्ट ने अपने निर्णय में यूनियन आफ इंडिया के द्वारा समय पर 862 करोड़ रुपये रिलीज किए जाने पर उनकी सराहना की। साथ ही कोर्ट ने उमा भारती मिनिस्टर, वाटर रिसोर्स रिवर डेवलपमेंट एंड गंगा रिज्यूविलेशन, यूपी सिंह डायरेक्टर जनरल (एनएमसीजी), प्रवीण कुमार डायरेक्टर (एनएमसीजी), ईश्वर सिंह लिगल एडवाइजर नमामी गंगा प्रोजेक्ट की गंगा की रक्षा के लिए सहयोग करने पर उनकी सराहना की। 
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