हल्द्वानी। बहुउद्देश्यीय जमरानी बांध परियोजना के विस्थापितों के लिए तैयार की गई पुनर्वास नीति का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। परियोजना के अधिकारियों और शासन ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इस प्रक्रिया से डूब क्षेत्र के ग्रामीणों में जल्द पुनर्वास प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी है।
जमरानी बांध परियोजना के लिए 2584.10 करोड़ रुपये मंजूर हुआ है। सरकार की ओर से इस परियोजना की फडिंग एजेंसी के रूप में एडीबी को नामित किया गया है। एडीबी के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम दो माह पूर्व जमरानी बांध स्थल का दौरा भी कर चुकी है। लेकिन जमरानी बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे ग्रामीणों को बसाने के लिए पुनर्वास नीति को अभी तक शासन से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण इसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक पुनर्वास नीति को लेकर शासन ने विगत दिवस मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी। जिसमें पुनर्वास नीति के प्रस्ताव को कैबिनेट में लाए जाने का बारे में मंथन किया गया। कैबिनेट में रखे जाने वाले प्रस्ताव को शासन ने ओके कर दिया है। डूब क्षेत्रवासियों को तराई के प्राग फार्म में बसाया जाना है। इसके लिए जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया भी शुरू होनी है। जमरानी बांध संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा है कि पुनर्वास नीति पर फैसला होने के बाद शासन को जल्द ही प्राग फार्म की जमीन का अधिग्रहण करने की कार्यवाही करनी चाहिए। इधर, एशियन डेवलेपमेंट बैंक ने तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद जमरानी बांध परियोजना के अधिकारियों से भूंकपीय सर्वे कर उसकी रिपोर्ट देने को कहा है।
-
परियोजना प्रबंधक हिमांशु पंत का कहना है कि पुनर्वास नीति का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा। इसकी तैयारी कर ली गई है। एडीबी ने भूकंपीय अध्ययन करने को कहा है उस पर काम चल रहा है।- हिमांशु पंत, परियोजना प्रबंधक
एक नजर
0 डूब क्षेत्र के 1323 परिवार हैं, इनमें से 226 परिवारों का पुनर्वास किया जाना है।
0 प्राग फार्म में 300 एकड़ भूमि की गई है चिन्हित
0 चीफ टाउन प्लानर के माध्यम से आवास योजना तैयार की जाएगी।
0 दिसंबर 2025 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास देने का है लक्ष्य