शहर की सड़कों पर रोज जाम लग रहा है। यातायात नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। लोग बीच सड़कों पर वाहन पार्क कर रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर भी कोतवाली के बाहर लंबा जाम लगा था। वीआईपी गाड़ियों के हूटर, सायरन और हार्न बजा बजाकर चालक शोर मचाए हुए थे। तिकोनिया से सिंधी चौक तक वाहनों की लाइन लगी थी, लेकिन इसके बावजूद कोतवाल आरएस मेहता और एसएसआई एनबी भट्ट कोतवाली परिसर में बैठे रहे।
दोनों में से किसी ने ये जहमत तक नहीं उठाई कि आखिर बाहर इतना शोर और जाम क्यों है। हैरानी की बात तो ये है कि कोतवाल आरएस मेहता के पास यातायात निरीक्षक का भी चार्ज है। यानी सड़कों पर जाम लगने पर उनकी जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है। दो दिन पहले ही डीआईजी जीएस मर्तोलिया अधिकारियों को थाने-चौकियों से बाहर सड़कों पर निकलने की हिदायत दे चुके हैं।
वो भी ऐसी स्थिति में तो रुटीन में। बृहस्पतिवार को तो उनकी सड़क पर विशेष जरूरत थी, लेकिन हूटर और सायरनों की आवाज कोतवाल और एसएसआई ने एक कान से सुन दूसरे कान से निकाल दी।