भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित शिप्रा नदी में अंग्रेजों के समय में बाढ़ सुरक्षा के लिए बनाए गए चेकडैम क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। रखरखाव के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने की वजह से इनके कभी भी ध्वस्त होने की आशंका बढ़ गई है।
अगर चेकडैमों को नुकसान पहुंचा तो शिप्रा की बाढ़ से कटने वाली जमीन से भवाली-अल्मोड़ा एनएच के लिए भी खतरा पैदा हो जाएगा।
आजादी से पहले अंग्रेजों ने शिप्रा से भूकटाव को रोकने और एनएच की सुरक्षा के लिए 1928 से 1935 तक दोपाखी, गरमपानी और रामगाड़ में कई चेकडैम बनवाए थे। इन चेकडैमों को बने हुए आठ दशक बीत चुका है। शिप्रा बरसात में ज्यादा उफनती है और नदी का वेग जमीन को काटता है।
इन चेकडैमों ने अब तक नदी के रौद्र रूप से जमीन और एनएच की सुरक्षा की है। एनएच से देखने पर सुरक्षित नजर आने वाले अधिकांश चेकडैमों की बुनियाद को काफी नुकसान पहुंच चुका है। कई चेकडैम तो अपनी जगह से नदी की ओर झुक गए हैं। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ने इन्हें दुरुस्त करने के लिए कोई पहल नहीं की है।
स्थानीय निवासी घन्नू गोस्वामी का कहना है कि यदि समय रहते चेकडैमों की सुध नहीं ली गई तो बारिश के मौसम में एनएच के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
शिप्रा में ब्रिटिशकालीन चेकडैमों के क्षतिग्रस्त होने संबंधी कोई जानकारी नहीं है। शीघ्र इनका निरीक्षण करने के बाद मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार शासन को भेजा जाएगा।
- हरीश ऐरी, सहायक अभियंता, सिंचाई खंड नैनीताल।