हल्द्वानी में प्रदेश का पहला समन्वित आयुष चिकित्सालय का शिलान्यास हो गया। केंद्रीय वित्त पोषित चिकित्सालय का शिलान्यास वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने किया।
आयुष चिकित्सालय में एक छत के नीचे पांच तरह की चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। नौ करोड़ 91 लाख की लागत से निर्मित होने वाला अस्पताल करीब 18 माह में बनकर तैयार हो जाएगा।
डा. हृदयेश ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार है। हल्द्वानी में एलोपैथिक चिकित्सा के साथ ही आयुर्वेद चिकित्सा सुविधाएं भी जनता को मिल सकेंगी। समन्वित चिकित्सालय में मरीजों को आयुर्वेद के साथ ही योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल को चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जाएगा। अस्पताल का निर्माण उत्तरप्रदेश निर्माण निगम करेगा। निगम प्रबंधक के मुताबिक अस्पताल का भवन 18 माह में बनकर तैयार हो जाएगा।
आयुर्वेद यूनानी निदेशक एके त्रिपाठी ने कहा कि चिकित्सालय निर्माण के लिए सात करोड़ की धनराशि केंद्र से अवमुक्त हो चुकी है। चिकित्सालय का भवन पांच मंजिला बनाया जाएगा। जिसमें प्रत्येक तल पर अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां कार्य करेंगी।
समन्वित चिकित्सालय 50 बेड का होगा। अस्पताल स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थित खाम बंगले के पास बनाया जा रहा है। निदेशक ने कहा कि बाकी जिलों से भी समन्वित अस्पताल निर्माण के लिए डीपीआर मांगी गई हैं।
इस दौरान अब्दुल मतीन सिद्दीकी, हेमंत बगडवाल, सुहेल सिद्दीकी, तारादत्त पांडे, खजान पांडे, प्रयागदत्त भट्ट और राजेंद्र सिंह नेगी समेत कई लोग मौजूद थे।
समन्वित आयुष चिकित्सालय के शिलान्यास समारोह में स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी को पहुंचना था। केंद्रीय वित्त पोषित अस्पताल होने के नाते सांसद भगत सिंह कोश्यारी को भी आमंत्रित किया गया था।
स्वास्थ्य मंत्री के नहीं पहुंचने पर वित्तमंत्री डा. हृदयेश ने शिलान्यास किया। सांसद भगत सिंह कोश्यारी भी क्षेत्र से बाहर होने के कारण कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।
जब किताब को बना लिया लोगों ने पंखा
आयुष चिकित्सालय का शिलान्यास समारोह स्टेडियम में हुआ। दोपहर में चिलचिलाती धूप में टेंट में एक भी पंखा नहीं लगा था। कुर्सियों में कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही सूचना विभाग की ओर से ‘चार वर्ष की यात्रा अखंड-आगे बढ़ता उत्तराखंड’ किताब रखवा दी गई।
कार्यक्रम सुबह साढ़े ग्यारह बजे निर्धारित था, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के नहीं पहुंचने की वजह से कार्यक्रम साढ़े बारह से बजे शुरू हुआ। उमस और चिलचिलाती धूप में टेंट के भीतर लोग पसीने से तरबतर हो गए।
गर्मी से बचने के लिए कुर्सियों में बैठे अधिकांश लोगों ने सरकार की उपलब्धियों से भरी किताबों को हाथ का पंखा बना लिया।