नैनीताल। हल्द्वानी में आवारा कुत्तों से राहगीरों, बच्चों व मोटर साइकिल सवारों को काटे जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह पुन: एक प्रत्यावेदन जिलाधिकारी और मुख्य नगर आयुक्त नगर को दें ताकि वे आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस बनाएं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
मामले के अनुसार हल्द्वानी के तल्ली बमौरी निवासी हेम चंद्र कपिल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हल्द्वानी शहर में प्रतिदिन 50 से 70 लोगों की आवारा कुत्तों से काटे जाने की शिकायत आती है।
याचिका में कहा गया कि पिछले एक वर्ष में 11 हजार लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा है। उनमें से एक मासूम की इलाज के दौरान मौत भी हो गई थी। याची का कहना था कि जब उसने बेस अस्पताल से इस बारे में मांगी तो पता चला कि एंटी रैबीज का एक इंजेक्शन चार मरीजों को लगाया जाता है, जबकि प्रतिदिन 50 से 70 इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। जब याचिकाकर्ता ने आवारा कुत्तों के लिए शेेल्टर हाउस बनाने के संबंध में जिलाधिकारी व मुख्य नगर आयुक्त से मांग की तो उनकी ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस बनाए जाने व अस्पतालों में एंटी रैबीज के इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाए जाने की मांग की। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता से कहा है कि वह इस संबंध में जिलाधिकारी और मुख्य नगर आयुक्त को पुन: प्रत्यावेदन दें ताकि वे इस संबंध में निर्णय लें।