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स्टोन क्रशर मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षों से मांगा जवाब

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने पौड़ी जिले की श्रीनगर तहसील के कांडा रामपुर में अलकनंदा स्टोन क्रशर लगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद स्टोन क्रशर, राज्य पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, राज्य सरकार व जियोलॉजिकल माइनिंग को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार श्रीनगर निवासी नरेंद्र सिंह सिंघवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि अलकनंदा स्टोन क्रशर, स्टोन क्रशर पॉलिसी 2020 व पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की नियमावली के विरुद्ध लगाया गया है। सरकार ने इसे पॉलिसी तथा हाईकोर्ट के बार-बार दिए गए निर्णयों के विपरीत जाकर लगाने की अनुमति दी है। याचिका में कहा कि इस मामले में अपर जिलाधिकारी स्तर पर हुई जांच के बाद रिपोर्ट में बताया गया था कि वहां पर स्टोन क्रशर एवं भंडारण के कारण नजदीकी गांव के पेयजल स्रोत, सिंचाई नहरों और जंगली जानवरों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
याचिका में कहा कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने इसके खिलाफ जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड उत्तराखंड व सरकार को ज्ञापन भी दिया लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने स्टोन क्रशर के संचालन पर रोक लगाने की प्रार्थना की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षों से जवाब मांगा है।
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