अतिथि शिक्षकों की दोबारा नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट ने दस अगस्त तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है। बुधवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। अतिथि शिक्षकों को अब दस अगस्त तक का इंतजार करना होगा।
हल्द्वानी निवासी आलोक परमार और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने 25 मई 2016 को अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासनादेश जारी किया। याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह से गलत है। अतिथि शिक्षकों का ब्लॉक स्तर पर चयन हुआ, लेकिन नए शासनादेश के अनुसार इन्हें ब्लॉक के अलावा जिला स्तर तथा मंडल स्तर पर समायोजित किया जा रहा है।
याचिका में कहा था कि अतिथि आंदोलन के कारण सरकार दबाव में आई और इनकी फिर से नियुक्ति का शासनादेश जारी किया गया। सरकार केवल अतिथि शिक्षकों के हितों के बारे में सोच रही है। प्रदेश में बीएड बेरोजगार हैं। सरकार की ओर से कहा गया था कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से दुर्गम क्षेत्रों में अच्छा कार्य हो रहा है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता बीबीएस नेगी ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्हें इस शिक्षा सत्र में अतिथि शिक्षकों को यथावत बने रहने की अनुमति दी जाए, ताकि विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों का भविष्य खराब न हो।