नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्टोन क्रशर पर्यावरणीय गाइडलाइन 2023 को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने दोनों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर आबादी और खेती वाले ग्रामीण क्षेत्रों में स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट लगाने के 422 लाइसेंस दिए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष अल्मोड़ा के पंत गांव की इंडिपेंडेंट मीडिया सोसायटी की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में राज्य सरकार की स्टोन क्रशर नियमावली को चुनौती दी गई है।
याचिका में क्या
- राज्य पीसीबी की नियमावली में आबादी की परिभाषा दस घरों तक सीमित।
- राज्य सरकार ने नियमावली में आबादी की परिभाषा को मात्र 10 घरों तक सीमित कर दिया है। उसमें भी नौ निवासियों की अनापत्ति के आधार पर दूरी के मानक समाप्त कर दिए गए हैं
- ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट की की संख्या 422 तक पहुंची।
- राज्य सरकार ने केंद्रीय प्रदूषण नियमावली-2010 में हाईकोर्ट के निर्देशों व कोर्ट की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को भी दरकिनार किया
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्टोन क्रशर पर्यावरण मानक नियमावली का कड़ाई से पालन कराने की मांग
- उत्तराखंड पहला राज्य जो स्टोन क्रशर संचालन के लिए पांच साल के लिए लाइसेंस दे रही है।
सीपीसीबी की स्टोन क्रशर गाइडलाइन के मुख्य बिंदु
- स्टोन क्रशर द्वारा अर्धवार्षिक आधार पर श्रमिकों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराया जाए।
- नए क्रशरों को केवल समर्पित क्रशर जोन में ही संचालित करने की अनुमति दी जाए।
- पीसीबी की नीतियों के अनुसार विशेष क्रशर ज़ोन स्थापित किए जाएं।
- इनमें अवस्थापना और प्रदूषण नियंत्रण की सुविधा स्थापित हो।
- ऐसे जोन की नियमित निगरानी टीम गठित की जाए।
- स्टोन क्रशर इकाई को केवल दिन के समय (सुबह 6.00 बजे से 10.00 बजे तक) संचालित किया जाए।