इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से बीएड करना अब आसान नहीं रहा। इग्नू से बीएड करने के लिए अभ्यर्थी को डीएलएड प्रशिक्षित होना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही हल्द्वानी के एमबीपीजी कालेज समेत प्रदेश के तीनों स्टडी सेंटरों की बीएड सीटें भी 300 से घटाकर 150 कर दी गई हैं।
सरकारी सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अलावा विद्यार्थियों को इग्नू से बीएड करने की सुविधा थी। बीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी को स्नातक या स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण होने के साथ - साथ दो वर्ष का शिक्षण अनुभव और मान्यता प्राप्त किसी स्कूल में कार्यरत होना अनिवार्य था।
इन नियमों के आधार पर छोटे स्कूलों में पढ़ाने वाले लोग भी आसानी से बीएड कर लेते थे। लेकिन अब इन नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इग्नू से बीएड करने के लिए अब अभ्यर्थी को ट्रेंड प्राइमरी टीचर होना यानि डीएलएड (डिप्लोमा इन इलेमेंट्री एजूकेशन) प्रशिक्षित होना जरूरी है।
इसके प्रमाणपत्र के आधार पर अभ्यर्थी इग्नू की बीएड प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा एनसीटीई के कड़े नियमों की वजह से प्रदेश में तीन स्टडी सेंटरों पर चल रहे बीएड पाठ्यक्रम की सीटें भी कम कर दी गई हैं। इग्नू के देहरादून रीजन के एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी और देहरादून समेत तीनों स्टडी सेंटरों की 100-100 सीटें को घटाकर भी अब 50-50 कर दिया गया है।
एमबी कालेज स्टडी सेंटर समन्वयक डा. वाईसी सिंह ने बताया कि नये सत्र के लिए बीएड प्रवेश परीक्षा नये नियमों के अंतर्गत ही होगी। उन्होंने बताया कि सीटें कम होने से अब ज्यादा अभ्यर्थियों को बीएड करने का मौका नहीं मिल सकेगा।
इग्नू से संचालित डिप्लोमा इन पालीटेक्निक के कोर्स भी बंद हो गए हैं। इग्नू से संचालित मेकेनिकल और इलेक्ट्रिकल टेक्निकल कोर्स यहां काठगोदाम स्थित एक निजी संस्थान पर कराए जाते थे। इन कोर्सों को आल इंडिया टेक्निकल एजूकेशन बोर्ड की आपत्ति के बाद बंद किया गया है।