एक ओर प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है वहीं दूसरी ओर उसे इस बात से कुछ भी लेना-देना नहीं रहता कि तकनीकी संस्थानों की क्या हालत है। मंडल मुख्यालय स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक नैनीताल की ही बात करें तो 1987 में स्थापित यह संस्थान किसी जमाने में शिक्षकों से लैस रहता था लेकिन आज इस संस्थान में स्वीकृत पदों के सापेक्ष आधे शिक्षक भी नहीं हैं।
सिविल इंजीनियरिंग, पीजीडीसीए जैसे महत्वपूर्ण ट्रेडों में शिक्षकों के तीन-तीन स्वीकृत पद खाली हैं। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि संस्थान में बिना शिक्षकों के कैसे पढ़ाई हो रही होगी। संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, फार्मेसी, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, पीजीडीसीए ट्रेडों में से हर एक में 40-40 जबकि इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल ट्रेडों में 60-60 सीटें हैं। इस संस्थान में हर वर्ष सभी सीटें भरी रहती हैं। इसके बावजूद शिक्षकों के पद नहीं भरे जा सके हैं।
कर्मशाला अनुदेशक के स्वीकृत 9 पदों के सापेक्ष 7 पद खाली हैं। संस्थान में स्वीकृत 48 पदों के सापेक्ष मात्र 19 पद ही भरे गए हैं जबकि 29 पद खाली हैं। वहां 11 संविदा शिक्षक रखे गए हैं। जिसमें से मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, पीजीडीसीए में 2-2, आईटी, फार्मेसी, गणित, भौतिकी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कर्मशाला अनुदेशक में एक-एक शिक्षक संविदा में रखा गया है।
वास्तव में शिक्षकों की कमी का मुद्दा गंभीर है। प्राविधिक शिक्षा निदेशालय श्रीनगर को रिक्तियों की सूचना भेजी जाती है। कुछ ट्रेडों में संविदा में शिक्षक रखकर तैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। निदेशालय से आग्रह किया गया है कि खाली पदों को जल्द भरा जाए। - एमके सिंह प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक नैनीताल।
फोटो सहित 14एनटीएल 04पी से