रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सीमाओं पर बसे गांवों को रोजगार से जोड़ा गया है। बी हाइव फेंसिंग के जरिए मधुमक्खी पालन से उत्पादित शहद से ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। पार्क मैनेजमेंट की जानकारी सीटीआर निदेशक ने पार्क पहुंचे अमरीका की क्लेम्सन विश्वविद्यालय के छात्रों को दी।
शुक्रवार को कॉर्बेट पार्क में अमरीकी क्लेम्सन विश्वविद्यालय के छात्रों का दल व ग्लोबल टाइगर फोरम के सदस्यों के साथ पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल को कॉर्बेट पार्क के ढेला, झिरना जोन में लगाई गई बी हाइव फेंसिंग, वाटर हाल्स व वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता आदि की जानकारी दी गई। सीटीआर निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने उन्हें बताया कि हाथियों की संख्या अधिक होने से मानव वन्यजीव संघर्ष का खतरा रहता है। इसके लिए पार्क की सीमाओं पर बी हाइव फेंसिंग लगाई गई है ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष को रोका जाए। बी हाइव फेसिंग के बाद हुए मधुमक्खी पालन से उत्पादित हुए शहद को अब बेचा जा रहा है। पार्क में मौजूद वाटर हाल्स में पानी की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी दी। प्रतिनिधि मंडल में क्लेम्सन विवि की प्रोफेसर एबी लैट सौकेबे सेन हार्पर, सारा एन व्हाइट, ग्लोबल टाइगर फोरम के अधिकारी अरुण कुमार, क्लेम्सन विवि के छात्रों में कैथरीन मून ट्विटी, एरियाना लूज़ सैपोनारा, लिली मॅई ओवेंगा, मेघन कैथलीन नोप आदि शामिल थे।