हिमालय संगीत शोध समिति की बैठकी होली में बुुजुर्ग और नए होल्यारों ने खूब धमाल मचाया। जेकेपुरम स्थित संस्था कार्यालय में हुई पुरुषों की बैठकी होली महोत्सव के अंतिम चरण की होली गायकी में डा. पंकज उप्रेती ने राग धमार में ‘अब कैसे जोबना बचोरी, फागुन मस्त महीने की होरी’ गीत सुनाकर रसिक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जगदीश जोशी ने धीरज उप्रेती की तबला संगत में ‘तू बांवरी बन के आई, तुझे किसने होरी खिलाई’, पुष्कर सिंह नेगी ने ‘सबको मुबारक होली, फागुन ऋतु शुभ अलबेली’, ललित मोहन जोशी ने ‘ये कैसी नादानी, मोरी अंगिया सानी’, वरिष्ठ होल्यार पं. जमुनादत्त कोठारी ने ‘बृज नगरी को चली राधे रानी’ होली गीत सुनाकर भव विभोर कर दिया।
होली गीतों की श्रंखला में पवन पांडे, संतोष पांडे, अभिषेक तिवारी, लोकेश फुलारा, गौरव पांडे ने प्रस्तुतियां दीं। होली गायन में प्रो. अतुल जोशी, गणेश सिंह खाती, मोहन चंद्र पाठक, मनोज पलड़िया, कवि नारायण सिंह बिष्ट, तिलक चंद्र अधिकारी, संतोष चंद्र पांडे, प्रदीप तिवारी, अशोक जोशी, भास्कर डालाकोटी, एनसी उपाध्याय, जगदीश पांडे, भुवन तिवारी,, डा. राजेंद्र कुमार पांडे, बसंत बल्लभ जोशी, मोहन चंद्र पांडे, मनोज कुमार पांडे आदि मौजूद थे।