नैनीताल। हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग मामले में सोमवार को होने वाली सुनवाई में रावत की ओर से पैरवी करने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व कानून मंत्री रविवार को यहां पहुंचे। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई होनी है। पूर्व में सुनवाई में न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे ने इस मामले को सुनने से इंकार कर दिया था जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रकरण को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ को स्थानांतरित कर दिया था।
रावत पर सरकार बचाने के लिए स्टिंग में विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप है। पूर्व सुनवाई में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ में रावत के अधिवक्ताओं ने सीबीआई की इस मामले में दाखिल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को अवैध करार देते हुए रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेने का विरोध किया था। पूर्व में सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जा रही है। मालूम हो कि 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में नौ कांग्रेस विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। हरीश रावत हाईकोर्ट गए थे जहां से उनकी सरकार बहाल हुई थी।
इस दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के एक निजी चैनल के मालिक ने हरीश रावत का स्टिंग किया था जिसमें हरीश रावत विधायकों की खरीद-फरोख्त की बात करते दिखाई दिए थे। इसी स्टिंग के आधार पर तत्कालीन राज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सरकार बहाल होने के बाद हरीश रावत ने इस केस की जांच सीबीआई के बजाय एसआईटी से करवाने की सिफारिश की थी, लेकिन यह मामला सीबीआई के पास ही रहा।
इसके बाद हरीश रावत गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे और हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि कोई भी कार्रवाई करने से पहले वह कोर्ट से अनुमति ले। तीन सितंबर को सीबीआई ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उसने इस केस की जांच पूरी कर ली है और वह जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करना चाहती है।