हल्द्वानी। असम रायफल में तैनात हल्द्वानी निवासी हवलदार रणवीर सिंह रावत मणिपुर में शहीद हो गए। 27 जनवरी की सुबह स्थानीय आतंकी गुटों ने घात लगाकर उन पर हमला बोल दिया था। शुक्रवार को रानीबाग में चित्रशिला घाट पर उनकी अंत्येष्टि कर दी गई।
चांदनी चौक बल्यूटिया गांव निवासी रणवीर सिंह 26 जनवरी की सुबह मणिपुर के सैलून क्षेत्र में अपने साथियों के साथ पेट्रोलिंग पर गए थे। 27 जनवरी की सुबह 6:30 बजे स्थानीय आतंकी गुटों ने घात लगाकर उन पर हमला बोल दिया। रणवीर की बाईं जांघ में दो गोलियां लगने पर साथी उन्हें आर्मी अस्पताल ले गए। सुबह 7:30 बजे उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार सुबह सात बजे उनका शव चांदनी चौक बल्यूटिया गांव पूरनपुर स्थित घर पहुंचा। इस दौरान उनके अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 11 बजे रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके दोनों बेटों की मौजूदगी में दोनों भाइयों ने चिता को मुखाग्नि दी।
पिता भी थे फौज में, भाई और उसका बेटा भी फौज में
हल्द्वानी। रणवीर के पिता हिम्मत सिंह रावत 3 गढ़वाल रायफल में हवलदार थे। उनके बड़े भाई लक्ष्मण सिंह रावत भी असम रायफल में सूबेदार हैं। लक्ष्मण सिंह का बेटा दिनेश सिंह रावत बंगाल इंजीनियर में सिपाही है। रणवीर तीन भाइयों में सबसे छोटे थे।
11 साल पहले चमोली से हल्द्वानी आ गया परिवार
हल्द्वानी। रणवीर का परिवार मूल रूप से थाला, थराली जिला चमोली का रहने वाला है। परिवार 11 साल पहले हल्द्वानी आ गया था। रणवीर और लक्ष्मण ने चांदनी चौक बल्यूटिया गांव में घर बनाए थे। परिवार में रणवीर की मां भी हैं। मझले भाई राजेंद्र मूल गांव में रहते हैं।
24 जनवरी को फोन पर हुई थी बात
हल्द्वानी। रणवीर की पत्नी बसंती देवी, दोनों बेटों मनीष और प्रियांशु को यकीन नहीं हो रहा है कि उनके ऊपर दु:ख का इतना बड़ा पहाड़ टूट गया है। मनीष ने बताया कि 24 जनवरी को पापा का फोन आया था, तब लंबी बात की थी। रणवीर के भाई लक्ष्मण ने बताया कि 26 जनवरी को वीडियो कॉल के जरिये बात की थी। रणवीर पिछले साल आठ जुलाई को घर आए थे और दो अक्तूबर को ड्यूटी पर गए थे। उस दौरान बड़े बेटे मनीष का उपनयन संस्कार भी कराया गया था। उन्हें मार्च में फिर घर आना था।
भाई ने निभाया यूनिट का फर्ज
हल्द्वानी। रणवीर के भाई लक्ष्मण ने बताया कि वह नागालैंड में ड्यूटी पर थे। उन्हें पता चल गया था कि उनका भाई अब जिंदा नहीं है। उन्होंने खुद को संभाला मगर यह बात घर वालों को नहीं बताई। रणवीर के अनुसार जब तक असम राइफल की ओर से यह जानकारी रणवीर के घर तक नहीं दी जाती तब तक वह ऐसा नहीं कर सकते थे। दोपहर एक बजे मनीष को असम रायफल की ओर से शहीद होने की जानकारी दी गई।