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शो पीस बन गए हैं नेहरू युवा केंद्र

Fri, 04 Dec 2015 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
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युवाओं को राष्ट्र और समाज निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से नेहरू युवा केंद्र खोले गए थे। इसका उद्देश्य युवाओं की योग्यता और प्रतिभाओं का विकास करना था। उत्तराखंड में खुले नेहरू युवा केंद्र बदहाल हालत में हैं।
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 हालत यह है कि 13 में से मात्र तीन जिलों में ही जिला युवा समन्वयक तैनात हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने के प्रति कितनी जिम्मेदार है।

बता दें कि पूरे देश में युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय के तहत वर्ष 1987 से नेहरू युवा केंद्र संचालित हैं। देश के 623 जिलों में नेहरू युवा केंद्र खोले गए हैं।
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 वर्तमान में नैनीताल जिले में मुन्नी टोलिया, हरिद्वार में दिनेश उपाध्याय और गोपेश्वर में डा. योगेश धस्माना जिला युवा समन्वयक के पद पर पूर्णकालिक रूप से तैनात हैं, बाकी जिलों में युवा समन्वयक नहीं हैं। मुन्नी टोलिया के पास अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों का भी अतिरिक्त दायित्व हैं।

जबकि बागेश्वर की कमान डा. योगेश धस्माना के पास है। गढ़वाल मंडल के देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी जिलों का जिम्मा दिनेश उपाध्याय, पौड़ी व रुद्रप्रयाग का जिम्मा डा. योगेश धस्माना के पास है।

जहां तक केंद्रों में लेखाकारों का सवाल है अल्मोड़ा में धर्म सिंह रावत, ऊधमसिंह नगर में महेश चंद्र भट्ट, बागेश्वर में भक्त दर्शन बिष्ट, पौड़ी में अंजना बिष्ट, टिहरी में संजय मिश्रा मंडल कार्यालय देहरादून और तेनजिंग नार्वे एडवेंचर सेंटर देहरादून की जिम्मेदारी भी विनोद गैरोला के पास है।

बाकी आठ केंद्रों में लेखाकारों का जिम्मा यही लेखाकार अतिरिक्त रुप से संभाल रहे हैं। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर, चंपावत और देहरादून केंद्रों में चतुर्थ श्रेणी कर्मी तक नहीं है।

नेहरू युवा केंद्रों का मुख्य कार्य 15 से 29 आयु वर्ग के युवक-युवतियों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना, गांव में स्वावलंबी युवा मंडलों का गठन करना, युवाओं का सांस्कृतिक, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक और चारित्रिक विकास करना, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित कर युवा मंडल के माध्यम से क्रियान्वित करना।

चंपावत जिले में वर्ष 2012 में केंद्र खुला तब से लेकर 30 अप्रैल 2015 तक केंद्र में आउट सोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी रखा गया। इसके बाद से वहां पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी ही नहीं है। जिला युवा समन्वयक और लेखाकार के पद खाली हैं। वर्तमान में वहां पर मात्र 2500 रुपये पर केंद्र से जुड़ा एक स्वयंसेवक केंद्र खोल रहा है।   

नेहरू युवा केंद्र संगठन उत्तराखंड के मंडल निदेशक बलविंदर सिंह खोसा कहते हैं कि मामला बेहद गंभीर है। मैं खुद भी केंद्रों की वर्तमान स्थिति को देखकर चिंतित हूं।

सभी स्तरों की नियुक्ति का अधिकार मंत्रालय को है। प्राथमिकता से हर माह रिक्तियों की सूचना मंत्रालय को भेजी जाती है। मंत्रालय में समय-समय पर होने वाली बैठकों में इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाता है। प्रयास किए जा रहे हैं कि पूर्णकालिक नियुक्ति होने तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रों में सही स्तरों पर तैनाती हो।
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