जनप्रतिनिधियों की आपसी खींचतान ने शहर का बेड़ा गर्क कर दिया है। आबादी लगातार बढ़ रही है। नेताओं के झगड़े में जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है। शासन स्तर पर पैरवी नहीं होने से विकास कार्यों से जुड़े कई मेगा प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही बंद हो चुके हैं।
भारत सरकार का 88 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट नेताओं और अफसरशाही की लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। प्रोजेक्ट से शहर का कायाकल्प होना था।
अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम फार स्माल एंड मीडियम टाउन (यूडीआईएसएसएमटी) योजना में देशभर में कई शहरों का कायाकल्प होना है। उत्तराखंड में हल्द्वानी समेत कई शहर योजना में चयनित हैं।
हल्द्वानी में सड़कों, चौराहों का चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण, ड्रेनेज सिस्टम, ट्रैफिक सिग्नल, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट समेत कई मेगा प्रोजेक्ट शुरू होने थे। भारत सरकार ने नगर निगम के अलग अलग प्रोजेक्टों की डीपीआर को मंजूर कर 104 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति भी दे दी। इसमें 16 करोड़ का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अतिरिक्त था।
हल्द्वानी शहर के बुनियादी विकास के ढांचे के लिए यह बड़ा प्रोजेक्ट था। प्रोजेक्ट को लेकर नेताओं में ही खींचतान शुरू हो गई। इसकी वजह प्रदेश में सरकार कांग्रेस और हल्द्वानी में मेयर भाजपा का होना माना जाता है। इस झगड़े के चलते शासन स्तर पर प्रोजेक्टों के लिए भारत सरकार में पैरवी नहीं हो सकी।
जिसके चलते भारत सरकार ने हाथ खींच लिए। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को छोड़कर बाकी सभी प्रोजेेक्ट रिजेक्ट हो गए। हल्द्वानी की जनता सिर्फ विकास के सपनों में खो गई। प्रोजेक्ट क्यों बंद हुए? इसको लेकर किसी भी नेता और अधिकारी के पास ठोस जवाब नहीं है।