हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नैनीताल जिले में प्रतिबंधित पालीथिन खुलेआम बिक रही है। तकरीबन सभी फल-सब्जी वालों से लेकर दुकानों में भी पालीथिन का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों को बाजारों में चेकिंग करने की फुर्सत तक नहीं है। इसका ही नतीजा है कि बाजार पालीथिन से पट गए हैं।
जुलाई 2014 से हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले में पालीथिन पर प्रतिबंध लगा दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी ने हर शहर एवं कस्बे में स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय और पुलिस के नेतृत्व में टीमें गठित की। टीमों ने ताबड़तोड़ छापामारी की। कोर्ट के आदेश पर ही टीमों ने जिले में दुकानों एवं ठेलियों से बरामद होने वाली पालीथिन पर पांच सौ रुपए प्रति पालीथिन तक जुर्माना किया। व्यापारियों में जुर्माने का खौफ दिखा और बाजार से प्रतिबंधित पालीथिन गायब हो गई। फड़, ठेलियों एवं दुकानों में कागज और कपड़े की थैलियां दिखने लगी। पालीथिन की सप्लाई करने वाले गायब हो गए और गोदामों में भी ताले लग गए।
प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही से यह अभियान कुछ महीनों बाद ठंडे बस्ते में चला गया। हल्द्वानी में विगत दो महीनों से पालीथिन की धरपकड़ के लिए छापामारी नहीं हुई है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि टीम तहसीलदार के नेतृत्व में बनी है। तहसीलदार और पुलिस नहीं मिलने से छापामारी नहीं कर पा रहे हैं। उधर, तहसील प्रशासन का कहना है वीआईपी ड्यूटी और तहसील के कामकाज से फुर्सत नहीं मिल रही है। ऐसे में पालीथिन चेकिंग करने का ही वक्त नहीं मिल रहा है।
हल्द्वानी में पालीथिन का कारोबार बरेली रोड मंडी से संचालित होता है। मंडी क्षेत्र नगर निगम की सीमा से बाहर है। कारोबारियों ने वहां गोदाम बनाए हैं। मंडी क्षेत्र में गोदामों में पालीथिन की चेकिंग का अधिकार नगर निगम के अधिकारियों को नहीं है। यहीं से प्रतिबंधित पालीथिन बाजार में खुलेआम बिक रही है। इसके अलावा काशीपुर-रामनगर रोड पर पालीथिन बनाने वाली फैक्ट्री है, जहां से भी पालीथिन बाजार में आ रही है।
- बृजेंद्र चौहान, कर अधीक्षक, नगर निगम
पैरोकारी न होने से अदालत में अटका मामला
प्रशासन की पैरोकारी नहीं करने से हल्द्वानी में ईजी डे और विशाल मेगा मार्ट का मामला अदालत में अटका पड़ा है। इन पर पालीथिन बरामद होने पर पांच सौ रुपए प्रति पालीथिन जुर्माना लगाया था।