गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए न शिक्षा विभाग ही गंभीर है और न ही जनप्रतिनिधियों को इसकी कोई चिंता। जेल रोड के प्राइमरी स्कूल के क्लासरूम की छत का प्लास्टर गिरने से आठ बच्चे घायल हो गए थे। इस स्कूल के जर्जर क्लासरूमों का निर्माण कराने की घोषणा वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने की थी मगर डेढ़ साल बीतने पर स्थिति जस की तस बनी है।
इसी तरह इंद्रानगर प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग जर्जर घोषित होने पर स्कूल तो खाली करवा दिया गया मगर अब तक न तो जर्जर घोषित स्कूल भवन का ध्वस्तीकरण हुआ और न ही निर्माण शुरू हुआ। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) के पद पर जीएस भारद्वाज ज्वाइन करने के बाद एक बार भी इन स्कूलों को देखने तक नहीं आए हैं। पेश है एक रिपोर्ट-
राजकीय प्राथमिक पाठशाला, जेल रोड में पिछले साल जुलाई माह में स्कूल चलने के दौरान क्लासरूम में लिंटर का प्लास्टर टूट कर गिर गया था। प्लास्टर के कई वजनी टुकड़े एक साथ गिरने से क्लासरूम में पढ़ रहे आठ बच्चे जख्मी हो गए थे।
डीएम के आदेश पर उस समय तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट आरडी पालीवाल और तत्कालीन एसडीएम हरबीर सिंह ने वहां पहुंचकर जांच की थी। एसडीएम ने पटवारी को बुलाकर रिपोर्ट तैयार करवा कर स्कूल को मरम्मत कार्य को बजट देने का भरोसा दिया था।
अगले दिन वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश ने पीडब्ल्यूडी और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ स्कूल का निरीक्षण कर उस क्लासरूम को भी देखा था जहां लिंटर का प्लास्टर गिरने से हादसा हुआ था। वित्तमंत्री ने लोनिवि को निर्देश दिए थे कि जर्जर स्कूल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र दिया जाएं।
कुछ दिन तक शिक्षा विभाग इस मामले को लेकर गंभीर रहा, फिर समय गुजरने के साथ शिक्षा अधिकारी इस मुद्दे को ही भूल गए। इधर, इस क्लासरूम को जर्जर घोषित कर उसमें ताला जड़ रखा है। पांच कक्षाओं के बच्चे दो कमरों में बैठकर पढ़ाए जा रहे हैं।
इंदिरानगर प्राइमरी स्कूल में 400 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा स्कूल भवन को जर्जर घोषित कर दिए जाने के चलते शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने आनन फानन में स्कूल को इसी वर्ष छह जनवरी को पड़ोस के बनभूलपुरा राजकीय इंटर कालेज में शिफ्ट करवा दिया था।
तब से प्राइमरी स्कूल इसी इंटर कालेज में संचालित हो रहा है। विभाग के अधिकारियों ने उस वक्त दावा किया था प्राइमरी स्कूल के जर्जर भवन के निर्माण के लिए बजट स्वीकृत हो गया है तथा जल्द निर्माण शुरू हो जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ।
अब पता लगा है कि इस स्कूल भवन के निर्माण के लिए विभाग से कोई बजट ही स्वीकृत नहीं हुआ तथा मंजूरी की प्रतीक्षा है। विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा स्कूल के 400 बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। गरीब बच्चों को इंटर कालेज के टूटे हॉल में बैठा कर एक से लेकर पांच तक की कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
गरीब बच्चे मध्याह्न भोजन की वजह से आते हैं लेकिन वो भी बनने में पानी न आने की वजह से दिक्कत हो रही है। आसपास से पानी का जुगाड़ कर काम चलाया जा रहा है।
इंदिरानगर प्राइमरी स्कूल के भवन निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है पर शासन से अभी तक बजट मंजूर होने की कोई सूचना नहीं मिली है। फिलहाल स्कूल को बनभूलपुरा जीआईसी के हॉल में संचालित किया जा रहा है। जेलरोड प्राथमिक स्कूल के क्लासरूम के निर्माण के लिए प्रस्ताव के बारे में कोई जानकारी नहीं है।