हल्द्वानी। गौलापार में संचालित राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर ने साबित कर दिया है कि पढ़ने के लिए केवल किताबें और पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बल्कि संसाधन भी जरूरी है। पिछले चार साल से कॉलेज का संचालन एक स्कूल में हो रहा है। विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए यहां न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही कोई अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। पांच कमरों में यहां शिक्षण कार्य हो रहा है। कॉलेज का अपना भवन नहीं बनने से संसाधनों का अभाव बना हुआ है।
गौलापार क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की पहुंच आसान बनाने के लिए चार साल पहले इस महाविद्यालय की यहां रखी गई। कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक और विषय हैं। जनरल विषयों के साथ यहां तकनीकी शिक्षा के लिए कंप्यूटर विज्ञान और पृथ्वी के आंतरिक भाग की जानकारी के लिए भू-गर्भ शास्त्र जैसे विषय संचालित हो रहे हैं।
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महाविद्यालय में लगातार घट रही है छात्रों की संख्या
कॉलेज में स्नातक में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय में 360 सीटें हैं। सत्र 2021-22 से लेकर अभी तक यहां किसी भी संकाय में सभी सीटें नहीं भर पाई, जबकि गौलापार क्षेत्र के सैंकड़ों युवा लंबी दूरी तय करके हल्द्वानी में उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए आते हैं। इस बार भी यहां अबतक लगभग 35 प्रवेश हो पाए हैं। माना जा रहा है कि संसाधनों के अभाव में विद्यार्थी कॉलेज से दूरी बनाए हुए हैं।
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चार साल से नहीं मिली कॉलेज भवन के लिए जमीन
कॉलेज भवन के लिए पिछले चार से जमीन तलाशी जा रही है, लेकिन अभी तक भूमि की तलाश पूरी नहीं हो पाई है। पूर्व में गौलापार के किशनपुर में एक जगह को चिन्हित किया गया था, लेकिन वहां भी बात आगे नहीं बढ़ पाई। विगत दिनों शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कॉलेज के प्राचार्य को जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर कॉलेज के लिए शीघ्र भूमि तलाशने को कहा है।
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महाविद्यालय के लिए गौलापार क्षेत्र में ही जमीन ढूंडी जा रही है। पूर्व में कॉलेज के लिए भूमि चिन्हित की गई थी, लेकिन कुड अड़चनों के कारण वह फाइनल नहीं हो पाई।
डॉ. संजय कुमार, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर।