हल्द्वानी। सनातन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व गंगा दशहरा इस वर्ष 25 मई को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना और विशेष योगों के संयोग के कारण यह तिथि शास्त्रसम्मत मानी गई है। श्री बुद्धिवल्लभ पंचांग के संपादक आचार्य पवन पाठक के अनुसार, स्कंदपुराण सहित विभिन्न धर्मग्रंथों में गंगा दशहरा को पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाला बताया गया है। इस दिन स्नान, दान, जप और पूजन से मनुष्य के दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। इनमें तीन शारीरिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक पाप बताए गए हैं। इसी कारण इसे ''''''''दशहरा'''''''' कहा जाता है। आचार्य पाठक ने बताया कि 25 मई 2026 को ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र सहित दस में से सर्वाधिक योग प्राप्त हो रहे हैं। धर्मशास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि ज्येष्ठ मास अधिकमास के रूप में हो, तो गंगा दशहरा का निर्णय अधिक ज्येष्ठ में ही किया जाता है। इसी आधार पर उत्तराखंड सहित अधिकांश उत्तर भारत में 25 मई को यह पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, पंचांग गणना की विभिन्न पद्धतियों के कारण पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में 26 मई को भी यह पर्व मनाया जा सकता है। संवाद
पर्व से जुड़े अनुष्ठान और लाभ
गंगा दशहरा के दिन प्रातःकाल गंगास्नान या गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इस दिन दस प्रकार के दान और शिव पूजन का विशेष महत्व है। ॐ नमः शिवाय तथा गंगे च यमुने चैव...मंत्रों का जप करना भी पुण्यदायी माना गया है। कुल पुरोहित को घर आमंत्रित कर भोजन एवं दक्षिणा देना तथा घर के द्वार पर गंगा दशहरा द्वारपत्र लगाना विशेष मंगलकारी है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजन और स्नान से आयु, आरोग्य, सुख-समृद्धि और पितृकृपा प्राप्त होती है।