जिलाधिकारी दीपक रावत ने कहा है कि घरेलू महिला हिंसा पीड़िता को परामर्श देने के साथ ही केस दर्ज होने पर पैरवी के लिए निशुल्क अधिवक्ता की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए पीड़िता चाहे तो अनिवार्य रूप से उसके साथ हिंसा करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।
बुधवार को घरेलू महिला हिंसा एवं निर्भया सेल की बैठक में डीएम ने कहा कि हर दफ्तर में यौन उत्पीड़न समिति गठित की जाए और ऐसा मामला होने पर जॉच समिति अपनी जांच रिपोर्ट जिला समिति को भेजे ताकि मामले में कार्रवाई की जा सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अनलेखा बिष्ट ने बताया कि जिले में 45 कार्यालयों में यौन उत्पीड़न समिति गठित कर दी गई हैं। डीएम ने कहा कि रेप व एसिड अटैक के वाद में शीघ्र परामर्श देने के साथ ही केस दर्ज कराना सुनिश्चित करें ताकि पीड़िता को अतिशीघ्र न्याय मिल सके। उन्होंने बताया जिले में 2015-16 में घरेलू हिंसा के 160 केस दर्ज हुए। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 87 केस दर्ज हो चुके हैं।
निर्भया सेल में बलात्कार के 12 व एडिस अटैक का एक केस दर्ज हुआ है। बैठक में सीएमओ डॉ. एलएम उप्रेती, डॉ. उषा जंगपांगी, एएमए हिमाली जोशी पेटवाल, डीजीसी सुशील शर्मा, अधिवक्ता संगीता टाकुली, एजीओ की कंचन भंडारी, सीडीपीओ चंद्रा मेहरा, जानकी उपाध्याय, भाग्यवंती पांडे, किरण रौतेला, चंपा कोठारी, कमला कोरंगा, गीता दरम्वाल, गीता आर्य थे।