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Nainital News: हमलावर वन्यजीव की तलाश में चार पिंजरे, 50 ट्रैप कैमरे और मचान से घेराबंदी

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ज्योलीकोट/नैनीताल। ज्योली क्षेत्र में वन्यजीव के हमले में महिला की मौत के बाद दहशत बनी हुई है। बुधवार देर रात वन्यजीव के गांव से एक कुत्ते को उठा ले जाने की घटना के बाद से विभाग की चुनौती बढ़ गई है। वन विभाग ने हमलावर वन्यजीव को पकड़ने के लिए घेराबंदी शुरू कर दी है। विभाग ने घटना के तुरंत बाद ही एक पिंजरा और चार ट्रैप कैमरे लगाए लेकिन उनमें किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दर्ज नहीं हुई। विभाग ने बृहस्पतिवार को पिंजरों की संख्या चार और 50 ट्रैप कैमरों से निगरानी शुरू कर दी है।
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संवेदनशील रीवर वैली क्षेत्र में एक मचान भी तैयार किया है जहां से वन कर्मी नजर बनाए हुए हैं। तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए तैनात की है। मनोरा, बड़ोन, नैना और भवाली रेंज से करीब 50 वनकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया है। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं। विभाग का फोकस न सिर्फ वन्यजीव को पकड़ने पर है बल्कि ग्रामीणों में फैले भय को कम करना भी प्राथमिकता में शामिल है। इधर, ग्राम प्रधान शेखर चंद्र भट्ट ने बताया कि गांव में भय का माहौल है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग उठाई है कि जब तक हमलावर वन्यजीव को पकड़ा नहीं जाता तब तक विभाग की गश्त बढ़ाने के साथ बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए एक ट्रक चारा गांव में भेज दिया है। हमलावर वन्यजीव के पकड़े जाने तक ग्रामीणों के पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था विभाग की ओर से की जाएगी। आकाश गंगवार, डीएफओ, नैनीताल
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हेमा की अंतिम विदाई में हर आंख हुई नम

नैनीताल। वन्यजीव हमले में जान गंवाने वाली हेमा पांडे का शव पोस्टमार्टम के बाद बृहस्पतिवार को उनके घर लाया गया। हेमा का शव घर पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अंतिम विदाई के दौरान हर ग्रामीण की आंखें नम हो गईं। इसके बाद पास में उनका अंतिम संस्कार किया गया। घटना के बाद से घर में मातम है। इधर, विधायक सरिता आर्य ने कहा कि इस घटना से परिवार को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई संभव नहीं है। विधायक ने कहा कि वह वन विभाग और जिलाधिकारी से वार्ता करेंगी ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। उन्होंने ग्रामीणों से अकेले जंगल की ओर न जाने की अपील की।



जान जोखिम में डालकर चारा लाने के लिए मजबूर हैं महिलाएं
ज्योली के जंगल में वन्यजीव का शिकार बनी महिला की मौत को 24 घंटे नहीं हुए थे कि बृहस्पतिवार दोपहर बाद ग्रामीण महिलाएं और पुरुष समूह में चारा लेकर आते नजर आए। गांव के अधिकतर लोग पशुपालन से आजीविका चलाते हैं। मवेशियों के लिए चारा जुटाना उनकी मजबूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में खतरा होने के बावजूद चारा नहीं लाएंगे तो पशुओं को क्या खिलाएंगे।
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