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वन रावतों के पास स्मार्टफोन नहीं, कैसे करें टीकाकरण के लिए पंजीकरण, हाईकोर्ट ने सरकार से 21 तक मांगा जवाब

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नैनीताल। वन रावत जनजाति के लोगों के पास स्मार्ट फोन नहीं हैं, जिससे वह कोविन एप पर पंजीकरण नहीं कर सकते। साथ ही वह टीके के बारे में कुछ जानते हैं। इसलिए उनको अभी तक कोविड टीकाकरण अभियान का लाभ नहीं मिला है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को 21 जून तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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अधिवक्ता सुहास रतन जोशी वन रावतों के टीकाकरण के मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाए थे। बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष रीवैक्सिनेशन इन वन रावत नाम की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि वन रावत जनजाति की कुल जनसंख्या 650 है। ये सभी गरीबी की रेखा से नीच जीवन यापन कर रहे हैं। आदम जनजाति पिथौरागढ़ जिले के तीन विकास खंडों धारचूला, डीडीहाट और कनालीछीना में रहती है। वन रावत की 95 प्रतिशत आबादी के पास सेल फोन और एक भी सदस्य के पास स्मार्ट फोन नहीं है। वन रावत अपनी एक भाषा बोलते हैं, इस वजह से कोरोना टीकाकरण के बारे में उन्हें कोई जानकारी भी नहीं है।
स्मार्टफोन नहीं होने से वह टीकाकरण के लिए कोविड एप पर पंजीकरण नहीं कर सकते हैं। याचिका में इस हिमालयी जनजाति के टीकाकरण के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है।
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