भवाली (नैनीताल)। साहसिक पर्यटन, नौकायन और सुकून के लिए पहचाने जाने वाले भीमताल, नौकुचियाताल और सातताल की वादियां कोविड कर्फ्यू के चलते वीरान हैं। चारों और सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोना के कारण पर्यटक गतिविधियां ठप होने से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
भीमताल, सातताल और नौकुचियाताल के पर्यटन स्थलों में हर साल हजारों सैलानी घूमने आते हैं लेकिन पिछले साल से कोरोना के चलते सैलानियों के नहीं आने से पर्यटन कारोबार चौपट हो गया है। हर रोज कमाकर खाने वाले सैकड़ों परिवार बेरोजगार हैं लेकिन अभी तक किसी ने उनकी सुध तक नहीं ली। कारोबारी बैंक से लिए ऋण की किस्त जमा न कर पाने से परेशान हैं।
पर्यटकों को नौका विहार कराकर आजीविका चलाते थे लेकिन इस साल तीन माह से खाली बैठे हैं। संकट की स्थिति है।
धीरज कुमार, नाव चालक सातताल
रेस्टोरेंट से तीन चार लोगों को रोजगार भी दिया था और रोजाना 10 हजार रुपये की बिक्री हो जाती थी। इस बार अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
गौरव सूर्या, रेस्टोरेंट संचालक
मार्च से जून तक सातताल में पर्यटकों की इतनी आवाजाही होती थी कि समय ही नहीं मिलता था लेकिन कोराना के चलते सब चौपट हो गया।
राजेश आर्या, शिकंजी विक्रेता सातताल
पर्यटकों के नहीं आने से विरानी छाई हुई है। इस बार सन्नाटा छाया है। अब रोजी रोटी की चिंता सता रही है।
राजेंद्र सिंह सूर्या, मैगी विक्रेता सातताल
वीरचंद्र गढ़वाली योजना से ऋण लेकर कैंप साइड खोली है लेकिन बैंक की किस्त और कर्मचारियों को वेतन देना ही मुश्किल हो गया है।
मयंक बिष्ट, संचालक माकोट हिल्स ईको कैंप, कालाखेत बेतालघाट