हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना के तहत ऊधमसिंह नगर में बन रही तराई नहर और चक फेरी नहर के निर्माण में वन भूमि की बाधा आ गई है। दोनों नहरों के निर्माण के लिए कुल 17.2 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हो रही है। इसके कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। अब निर्माण के लिए वन भूमि की क्लियरेंस का इंतजार है।
परियोजना इकाई के अधिकारियों के अनुसार तराई नहर और चक फेरी नहर ऊधमसिंह नगर के किसानों के लिए जीवन रेखा साबित होंगी। इनसे हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिलना है लेकिन नहरों का प्रस्तावित मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजर रहा है। इसी कारण परियोजना इकाई ने वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव तैयार कर वन विभाग के नोडल ऑफिस देहरादून को भेज दिया है।
प्रस्ताव में वन भूमि के बदले क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और अन्य शर्तों का भी उल्लेख किया गया है। अब देहरादून से फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलने के बाद ही नहरों के निर्माण का कार्य शुरू किया जा सकेगा।
तराई और चक फेरी दोनों नहरों के निर्माण के लिए 17.2 हेक्टेयर वन भूमि का मामला देहरादून नोडल ऑफिस को भेजा जा चुका है। वन विभाग से अनुमति प्राप्त होते ही नहरों का निर्माण कार्य शुरू होगा। परियोजना का लक्ष्य किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। - ललित कुमार, उप महाप्रबंधक, जमरानी बांध परियोजना इकाई