हल्द्वानी। मार्च के महीने में ही गर्मी पसीने छुड़ा रही है। तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में जंगलात के सामने वनाग्नि के खतरे को लेकर चुनौती बढ़ गई है। बीते पंद्रह दिनों में कुमाऊं मंडल में आरक्षित और वन पंचायत, सिविल सोयम के वनों में 34 घटनाएं हो चुकी हैं। वन विभाग का दावा है कि यह बहुत छोटी- छोटी आग थी, जिन पर जल्द ही काबू भी पा लिया गया था। जंगल की आग से निपटने को लेकर आवश्यक तैयारी कर ली गई है।
पिछले साल कुमाऊं में जंगल की आग से भारी नुकसान हुआ था। हालात बिगड़ने पर एयर फोर्स के हेलिकाप्टर मंगाए गए थे। एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई गई थी। इस साल जाड़ों में हुई बरसात और बर्फबारी के चलते जंगल में खासी नमी थी, लेकिन मार्च के महीने में जैसे गर्मी बढ़ रही है, उसके साथ ही जंगल की आग का खतरा भी बढ़ गया है। वनाग्नि की छोटी- छोटी घटनाएं भी शुरू हो गई हैं। कुमाऊं मंडल में आरक्षित वन क्षेत्र में 25 और वन पंचायत और सिविल सोयम क्षेत्रों में नौ घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें करीब पचास हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा प्रभावित हुई है।
फायर वॉचर तैनात और मॉडल क्रू स्टेशन तैयार
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल कहती हैं कि जो आग की घटनाएं हुई हैं, वह छोटी थीं जिन पर जल्द काबू पा लिया गया था। जंगल की आग से निपटने के लिए मॉडल क्रू स्टेशन तैयार किए जा रहे थे, इसमें कुछ तैयार हो गए हैं कुछ के जल्द कार्य पूूरे होने की उम्मीद है। फायर वॉचर को भी तैनात किया जा चुका है। फायर लाइन की सफाई आदि कराई जा रही है। कालागढ़ वन प्रभाग डीएफओ प्रकाश आर्य कहते हैं कि कंट्रोल बर्निंग करने समेत अन्य सभी कार्य किए जा रहे हें। आने वाले समय में चुनौती बढ़ सकती है, इसे लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।