रामनगर में एसडीओ पर हमले के दुस्साहस के बाद शांत रहने वाला वन विभाग अब तस्करों की फैलाई अशांति आक्रामक ढंग से दूर करेगा। खनन माफिया का जंगलराज खत्म करने की तैयारी के लिए हर अफसर, कर्मचारी अब खाली हाथ नहीं, ज्यादा आधुनिक हथियारों से लैस होगा। माफिया के हमले पर उसे जवाब मॉडर्न पिस्टल, रिवॉल्वर जैसे वैपन से मिलेगा। मामला मुख्य वन संरक्षक तक पहुंच चुका है। हथियारों की जरूरत की समीक्षा की जा चुकी है। अब तगड़े एक्शन से तस्करों का जंगल में मंगल नहीं अमंगल होगा, यह तय माना जा रहा है।
वन विभाग के तराई पश्चिमी डिवीजन वन प्रभाग के एसडीओ के आवास पर खनन माफिया के धमकी भरे पत्र के बाद वन विभाग अपने सभी प्रभाग में हथियारों की खेप बढ़ाएगा। मुख्य वन संरक्षक ने सभी प्रभागों के लिए हथियार खरीद के प्रस्ताव व चल रही प्रक्रिया की जानकारी भी मांग ली है।
रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ मनीष जोशी के साथ खननमाफिया ने मारपीट की थी। जैसे-तैसे हवाई फायरिंग कर उनकी जान बचाई गई। वह पुलिस में गए और तहरीर दी। पुलिस तत्काल एक्शन लेने के बजाय दूसरे पक्ष की तहरीर लेकर जांच में जुट गई। जब उच्चाधिकारियों ने नकेल कसी तो स्थानीय पुलिस सक्रिय हुई।
उधर खननमाफिया ने धमक जमाने के उद्देश्य से एसडीओ के आवास पर पत्थरबाजी कर दी। फिल्मी स्टाइल में पत्थर में कागज लपेटकर फेंका। लिखा तुम गोली हवा में चलाओगे हम नहीं...। इस बात ने विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। उधर कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक ने इसे लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया है।
यह होगी खरीद
वन विभाग रेंजरों के लिए पिस्टल और फॉरेस्टरों के लिए रिवॉल्वर खरीदेगा। फील्ड कर्मचारियों के लिए 315 बोर की एक नाली और दोनाली बंदूकें खरीदी जाएंगी। हथियारों की खरीद के लिए 30 लाख रुपये का प्रस्ताव तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने भेज दिया है। उम्मीद है कि इस पैसे से जल्द ही हथियारों की खेप यहां पहुंचेगी। तराई-पश्चिमी प्रभाग में करीब 150 का स्टाफ है जिसके लिए यह खेप आ रही है।
यह अत्यंत गंभीर प्रकरण है। पुलिस घटना के समस्त पहलुओं की जांच कर रही है। वन विभाग अवैध खनन और अवैध पातन में लिप्त अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। फील्ड कर्मचारियों के हथियार और अन्य उपकरण के क्रय का प्रस्ताव सक्षम स्तर पर प्रेषित किया गया है। -धीरज पांडे, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं मंडल
तस्कर हावी, एक वर्ष में सामने आ चुके हैं कई मामले
हाल के वर्षों में खनन माफिया ने अपना वर्चस्व जमाने के लिए विभागीय अधिकारियों को टारगेट करना शुरू कर दिया। खनन, लकड़ी तस्करों का गठजोड़ भी कुछ विभागीय लोगों के साथ बताया जाता है। यही कारण है कि तस्कर बेखौफ होकर वारदात काे अंजाम देने से भी नहीं चूकते हैं। पूर्व में जो मामले सामने आए हैं। वह भी पुलिस की फाइलों में कैद हैं।