नैनीताल जिले में फूलों की खेती का रकबा और नर्सरी दोनों में ही लगातार इजाफा हो रहा है। फूलों की खेती से न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि नैनीताल जिले को प्रदेश में अलग पहचान भी मिल रही है। जिले के फूलों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। नैनीताल जिले में वर्ष 2020-21 में 42.7 हेक्टेयर भूमि में फूलों का उत्पादन होता था, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में बढ़कर 53.93 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। फूलों के कारोबार से जिले में एक हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। जिले में भीमताल, पदमपुरी, कोटाबाग, भवाली, हल्द्वानी, नयागांव, पहाड़पानी, बजून, भटेलिया, रामगढ़ व रामनगर और इसके आसपास का क्षेत्र पुष्प उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। यहां स्थानीय लोगों के अलावा बाहर के कई लोगों ने भूमि लीज पर लेकर फूलों का कारोबार शुरू किया है।
कई प्रदेशों तक पहुंच रही यहां की पैदावार
फूलों की खेती पर शासन से मिलता है अनुदान
पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी मिशन योजना (एचएमएनईएच) के तहत उद्यान विभाग काश्तकारों को फूलों की खेती के लिए अनुदान पर पॉलीहाउस और पुष्प बीज व बल्ब उपलब्ध कराता है। जिला योजना के तहत 80 प्रतिशत अनुदान पर जरबेरा, गुबाल, लिलियम के बल्ब व पौध दी जाती है। इसके अलावा मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत अनुदान पर बल्ब व पौध दी जाती है। उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में तराई भाबर और पर्वतीय क्षेत्रों में 53.93 हेक्टेयर में अलग-अलग प्रजातियों के सालाना 223.83 मैट्रिक टन फूलों का उत्पादन होता है। इसमें लिलियम, कारनेशन, ग्लैडूलस और गुलाब की सालाना पैदा होने वाली 373.24 लाख स्पाइक भी शामिल हैं।
घरों और प्रतिष्ठानों की शोभा बनते हैं पोटेट प्लांट
जिले में फूलों की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में 70 से अधिक लोग फूलों की खेती के लिए चलाई जाने वाली प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। जिले में पैदा होने वाले फूलों की मांग देश के कई प्रांतों में है। इससे कई लोगों को रोजगार मिला है। -डॉ. रजनीश सिंह मुख्य उद्यान अधिकारी नैनीताल