फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौकी प्रभारी को रिश्वत देने के दो आरोपियों को पांच पांच साल के सश्रम कारावास की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम राजीव कुमार खुल्बे ने हल्द्वानी क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार करने के एवज में पुलिस अधिकारी को रिश्वत देने के मामले में दो दोषियों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर दोनों को दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन

अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 18 मार्च 2016 को हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर चौकी प्रभारी रजत कसाना से रामेश्वर सिंह निवासी जोशीखोला बड़ी मुखानी और ज्ञानेंद्र कुमार ओझा निवासी कृष्णानगर थाना इज्जतनगर बरेली हाल निवासी जोशीखोला हल्द्वानी मिलने पहुंचे। उन्होंने होली के मौके पर शराब का अवैध कारोबार करने के एवज में 40 हजार की रिश्वत पेश की। पुलिस ने लिफाफे में मिली रिश्वत की धनराशि को मौके पर सील करते हुए दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया। मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार ने पूर्ण कर दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्य को साबित करने के लिए सीओ राजेंद्र सिंह ह्यांकी, चौकी प्रभारी रजत कसाना समेत पांच गवाह पेश किए। न्यायालय में गवाही के दौरान एक स्वतंत्र गवाह विनीत कुमार पूर्व में दिए अपने बयान से मुकर गया।
विज्ञापन

गवाहों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 के तहत दोषी मानते हुए पांच पांच साल के सश्रम कारावास और पांच पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर दोनों को दो दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस फैसले के बाद जमानत पर चल रहे दोनों आरोपियों को न्यायालय ने न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया।
विवेचनाधिकारी के खिलाफ न्यायालय ने की टिप्पणी
नैनीताल। शराब के अवैध कारोबार को लेकर पुलिस अधिकारी को रिश्वत देने संबंधी मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे ने जारी आदेश में विवेचनाधिकारी (तत्कालीन सीओ स्वतंत्र कुमार) के खिलाफ भी टिप्पणी की है। कहा कि उनके द्वारा यूपी पुलिस रेगुलेशन और उत्तराखंड में लागू रेगुलेशन संख्या 108 व 109 का पालन नहीं किया गया है। धारा 172 दंड प्रक्रिया संहिता में दिए प्रावधानों की अनदेखी की है।
निर्णय में यह भी उल्लेखित है कि मामले की विवेचना एक क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी ने की है। इससे त्रुटिपूर्ण विवेचना की उम्मीद नहीं की जा सकती है। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की है कि आपराधिक कृत्य में अपराधी की दोषिता सिद्ध करने के लिए विवेचना एक महत्वपूर्ण आधार होता है और विवेचक को विवेचना इस प्रकार करनी चाहिए जो विधिक प्रावधानों के अनुकूल हो और उसमें किसी तरह की त्रुटि न रहे। न्यायालय ने इस फैसले के निर्णय की एक प्रति उत्तराखंड शासन के निदेशक अभियोजन को भी भेजने के आदेश दिए हैं। कहा कि न्यायालयों में चल रहे मामलों में शासन स्तर से विवेचनाधिकारियों को उचित निर्देश दिए जाएं, जिससे कि वह भविष्य में विवेचना में इस तरह की लापरवाही न बरतें।
आपराधिक मामलों में विवेचनाधिकारियों को जमीनी स्तर पर पड़ताल करने की जरूरत है। अधिकांश मामलों में विवेचनाधिकारियों की विवेचना में गलतियों और कमियों के कारण कई बार गंभीर आपराधिक मामलों के अभियुक्तों के भी दोषमुक्त होने की संभावनाएं बनी रहती हैं।
विज्ञापन

- सुशील कुमार शर्मा, जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नैनीताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें