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साढ़े पांच हजार वाहन गौला नदी में उपखनिज लेने नहीं उतरे

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हल्द्वानी। स्टोन क्रशरों की उपखनिज खरीदने की सीमा खत्म होने के बाद से स्टोन क्रशरों ने उपखनिज खरीदना बंद कर दिया है। इस कारण मंगलवार को साढ़े पांच हजार वाहन गौला नदी में उपखनिज लेने नहीं उतरे। खनन कार्य बंद होने से श्रमिकों का घर लौटना शुरू हो गया है। अब वन विकास निगम को राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं होने की चिंता सताने लगी है।
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वन विकास निगम के डीएलएम वाईके श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को ढाई हजार वाहन ही उपखनिज लेने गौला नदी में उतरे। कहा कि शांतिपुरी और रामपुर रोड स्थित एक-एक स्टोन क्रशर ही उपखनिज ले रहा है। डीएलएम श्रीवास्तव ने बताया कि नदी में अभी आठ लाख घनमीटर उपखनिज बचा हुआ है। शासन उपखनिज लक्ष्य बढ़ाने के लिए एक कमेटी गठित कर चुका है, जो 17-18 मार्च को गौला नदी का स्थलीय निरीक्षण करेगी और तय करेगी कि अभी नदी से कितना उपखनिज और निकल सकता है। कहा कि ऐसी स्थिति में उपखनिज लक्ष्य कैसे पूरा होगा।
वाहन स्वामियों ने शीशमहल गौला गेट पर किया प्रदर्शन
हल्द्वानी। शीशमहल गौला खनन गेट पर वाहन स्वामियों ने मंगलवार को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर छोटे कारोबारियों का रोजगार छीनने का आरोप लगाया। मंगलवार को शीशमहल गौला खनन गेट पर प्रदर्शन के दौरान राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि सरकार ने स्टोन क्रशरों के स्टॉक का निर्धारण कर दिया है। इससे वाहन स्वामियों के सामने उपखनिज डालने की समस्या खड़ी हो गई है। नए नियम से वाहन स्वामियों और श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। डंपर मालिक योगेंद्र बिष्ट ने कहा कि सरकार पहले ही छोटे स्टॉक करने वालों पर नए-नए नियम लगाकर उनका कारोबार छीन चुकी है। गौला से जुड़े डंपर मालिक का कारोबार कोरोनाकाल में चौपट हो गया है। वाहन स्वामियों ने एक स्वर में स्टोन क्रशरों की स्टॉक लिमिट बढ़ाने की मांग उठाई। यहां रोहित शाह, रक्षित शर्मा, शाहिद हुसैन, हरीश भंडारी, सुंदर बिष्ट, विनय दानी, पूरन बिष्ट, बहादुर सिंह, युगल जोशी आदि रहे।
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