फिल्म एवं आर्ट्स गिल्ड ऑफ उत्तराखंड एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में दो दिनी फिल्म फेस्टिवल शनिवार को शानदार ढंग से शुरू हो गया। हल्द्वानी में पहली बार आयोजित फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन मुक्त विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में कुलपति प्रो. सुभाष धूलिया ने किया। उन्होंने प्रसिद्ध तिब्बती कवि तेनजिन त्सुन्दु की किताब ‘मैं जीवन हूं’ का विमोचन भी किया।
कुलपति प्रो. धूलिया ने कहा कि फीचर फिल्म किसी कहानी पर आधारित होती है जबकि डाक्यूमेंट्री फिल्म में सच्चाई दिखती है। इसका मानव जीवन पर सीधा प्रभाव होता है। कार्यक्रम में प्रसिद्ध तिब्बती कवि तेनजिन त्सुन्दु ने पुस्तक के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि तिब्बत को लेकर उनका संघर्ष जारी है, अब राजनैतिक तौर पर उठाने के बाद अब साहित्य के माध्यम से अपनी बात को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है।
इस दौरान यूओयू के पत्रकारिता विभाग के निदेशक प्रो. गोविंद सिंह, फिल्म फेस्टिवल के संयोजक एवं साहित्यकार अशोक पांडेय, मंडी समिति के चेयरमैन सुमित हृदयेश, अनिल भाकुनी, नीरज अग्रवाल, योगेश बड़ौला, विजय भट्ट, ललित पंत, हिंदुस्तान टाइम्स दिल्ली से आई पत्रकार अदिती जोशी, दुर्गा वाहिनी समिति की स्वाति दत्त, तनूजा मेलकानी, विशाल विनायक आदि थे।
डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘निर्णय’ ने दर्शकों को झकझोरा
समारोह में कुछ क्षणों के बाद वो घड़ी आ गई, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। फिल्म फेस्टिवल में पुष्पा रावत द्वारा निर्मित डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘निर्णय’ का प्रदर्शन किया गया। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म में कुछ दोस्तों के जीवन से जुड़े पहलुओं को दर्शाया गया है कि वो जीवन में कुछ बनना चाहते थे, मगर रुकावटों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उत्तराखंड की बेटी की यह डाक्यूमेंट्री फिल्म वर्तमान सोसाइटी की सच्चाई को बखूबी प्रदर्शित कर दर्शकों की सराहना बटोरने में कामयाब रही।
फिल्म ‘जिया : इन द नेम ऑफ द क्वीन’ ने छोड़ी छाप
रूड़ी सिंह की फिल्म ‘जिया : इन द नेम ऑफ द क्वीन’ का प्रदर्शन किया गया। इसमें रानी जियारानी के जीवन से जुड़ी कहानी को सफलता पूर्वक दर्शकों के समक्ष रखने की कोशिश की गई। कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न स्थानों से कत्यूरी वंशजों द्वारा यहां रानीबाग में की गई जियारानी की पूजा अर्चना को प्रभावी ढंग से दिखाया गया है। जियारानी के घाघरे के प्रतीक चित्रशिला पर पूजा अर्चना के बाद रातभर जागर लगाकर अपनी कुल देवी को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले कार्यक्रम को भी दिखाया गया है। पहाड़ के लोगों की ‘जागर’ के प्रति आस्था को भी दर्शाया गया।
‘आई वंडर’ बच्चों की सच्चाई दर्शाने में कामयाब
अनुपमा श्रीनिवासन द्वारा निर्देशित डाक्यूमेंट्री ‘आई वंडर’ का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें राजस्थान, तमिलनाडु और सिक्किम के बच्चों की स्थिति को दर्शाया गया है। हालांकि बच्चों की समस्याओं पर आधारित इस डाक्यूमेंट्री फिल्म का अपनी कोई राय समाज तक पहुंचाने का कोई मकसद नहीं दिखा।