कालाढूंगी के चकलुवा के कई गावों को होकर जाने वाला निहाल नाला लगातार तबाही मचा रहा है। मंगलवार की रात आई तेज बारिश में उफान पर आए नाले एक बार फिर विदरामपुर, रामपुर, लछमपुर, प्रतापपुर, खड़कपुर गावों में तबाही मचा डाली। रामपुर गांव निवासी प्रेम बहादुर और अनिल कुमार के घर नाले में समा गए। घर में मौजूद लोग अपनी जान बचाकर भागे और पड़ोसियों के यहां शरण ली। जितना सामान हाथ लगा बचा लिया, अधिकांश सामान नाले के बहाव में बह गया।
वहीं यह नाला कटाव करते हुए तोक बहादुर, लाल बहादुर, मंजू देवी के घरों के निकट तक पहुंच गया है। जो परिवार खतरे की जद में हैं। रामपुर गांव निवासी शंकर दत्त जोशी की तकरीबन ढाई बीघा तो बिशन राम, दिगंबर सिंह रावत की 2-2 बीघा कृषि और दर्जनों लीची की पेड़ भी नाले में समा गए। इसी के साथ नंदन सिंह बोरा, अशोक कुमार, हयात सिंह बोरा, पुष्कर सिंह खोलिया, लाल बहादुर थापा, प्रताप बसेड़ा, भुवन मिश्रा, मंगल राठौर, विक्रम राठौर, कुंदन बोरा, राजू राठौर, गीता देवी, लाल सिंह बसेड़ा, दीवान सिंह आदि तमाम ग्रामीणों की कृषि भूमि फसल के साथ नाले के बहाव में बह गई।
बारिश होने पर उफान पर आ रहे निहाल नाले से लोग सहमे हुए हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन के प्रति आक्रोश जताते हुए कहा कि कई सालों से बरसात के समय नाला कटाव कर रहा है। राजस्व और सिंचाई विभाग की टीम आती जरूर है, मगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते हैं। ग्रामीणों ने इस नाले को निहाल नदी में ही चैनलाइज किए जाने की भी मांग रखी। पूर्व फौजी मोहन सिंह खोलिया, छत्र सिंह कन्याल, कुंदन जंतवाल, वीरेंद्र कुमार ने शासन प्रशासन से नाले से ग्रामीणों की सुरक्षा किए जाने के साथ ही इस नाले को निहाल नदी में चैनलाइज किए जाने की मांग भी की।
वन निगम और हाइडिल नाले ने भी किया नुकसान
वन निगम और हाइडिल नाला भी अब तमाम गांवों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। निगल नदी से कटकर आने वाले यह छोटे छोटे नाले भी अब विकराल रूप धारण करते जा रहे हैं। जो गावों के भविष्य के लिए चिंता की बात है। यह नाले भी गुलजारपुर, पूरनपुर गावों में भारी नुकसान कर रहे हैं।
नाले से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए राजस्व की टीम ने बुधवार को क्षेत्र का भ्रमण किया दो परिवार जिनके मकान बह गए उनको आर्थिक सहायता दे दी गई है बाकी नुकसान की रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है।
-रेखा कोहली एसडीएम कालाढूंगी