सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में नैनीताल तहसील के दाखिल खारिज मुहर्रिर पर 42.32 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का गबन करने के आरोपों की पुष्टि हुई है। डीएम के आदेश पर तहसीलदार हल्द्वानी ने दाखिल खारिज मुहर्रिर मो. जफर आलम के खिलाफ धारा 409 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। मामला करीब पांच साल पुराना है। सरकारी कर्मचारी पर खतौनी मद, ई-जनाधार और आय-व्यय की राशि गबन करने का आरोप है।
दाखिल खारिज मोहर्रिर मो. जफर आलम पांच साल पहले हल्द्वानी तहसील में नायब नाजिर के पद पर तैनात थे। पद पर रहते हुए उन पर 42,32,262 रुपये के गबन का आरोप लगा था। मामले की जांच की गई तो पता चला कि तत्कालीन नायब नाजिर ने खतौनी मद में 27,08,010 रुपये, ई-जनाधार से प्राप्त आय के 14,92,452 रुपये और वासिल वाकी नवीस (आय-व्यय) के 28,800 रुपये गबन किए थे। यह राशि उन्होंने जनाधार केंद्रों से तो वसूल ली, लेकिन उसे विभागीय बैंक खाते में जमा नहीं कराई। मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम को सौंपी गई। इसके बाद वर्ष 2020 में तत्कालीन तहसीलदार हल्द्वानी नीतू डागर ने इसकी जांच की और आख्या रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी।
इसके बाद मो. जफर आलम पर लगे आरोपों की दोबारा जांच 2021 में सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह को जांच सौंपी गई। उनकी जांच रिपोर्ट में मो. जफर आलम पर लगे गबन के आरोप सही साबित हुए। उन्होंने इसकी रिपोर्ट तत्कालीन डीएम को सौंप दी। इसके बाद कार्रवाई नहीं हुई।
अब वर्तमान डीएम वंदना ने जब बीते नवंबर में फाइल देखी तब उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने तहसीलदार हल्द्वानी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए। उधर एडीएम पीआर चौहान ने दाखिल खारिज मुहर्रिर के मासिक वेतन से 20 हजार रुपये प्रतिमाह कटौती कर वसूली के निर्देश जारी किए। वहीं तहसीलदार सचिन कुमार की तहरीर पर पुलिस ने बुधवार की रात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच राजपुरा चौकी प्रभारी एसआई नरेंद्र कुमार को सौंप दी है। इधर, तहसीलदार सचिन कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को दाखिल खारिज मुहर्रिर ने मुकदमे के खिलाफ स्टे ले लिया है।