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प्राथमिक, जूनियर के 834 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे

Wed, 13 Jul 2016 01:59 AM IST
भूपेंद्र मोहन रौतेला, नैनीताल।
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श‌िक्षक - फोटो : अमर उजाला
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एक ओर प्रदेश सरकार सब पढ़ें, सब बढ़ें। बिन शिक्षा के नहीं भले, स्कूल चलें-स्कूल चलें जैसे स्लोगनों के माध्यम से समय-समय पर रैलियों के माध्यम से बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए प्रेरित कर रही है। दूसरी ओर कुमाऊं में 6616 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में से 834 स्कूल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। कुमाऊं मंडल में प्राथमिक स्तर पर 745 प्राइमरी और 89 जूनियर हाईस्कूलों में एक शिक्षक पर सभी कक्षाओं और विषयों को पढ़ाने की जिममेदारी है। 
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कुमाऊं में 5520 प्राथमिक विद्यालय हैं। जिसमें से अल्मोड़ा में 1448, बागेश्वर में 594, चंपावत में 516, नैनीताल में 989, पिथौरागढ़ में 1183 और ऊधमसिंह नगर में 790 विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों में से 745 स्कूलों में मात्र एक-एक शिक्षक हैं।

अल्मोड़ा जिले में 285, बागेश्वर में 193, चंपावत में 36, नैनीताल में 144, पिथौरागढ़ में 47 तथा ऊधमसिंह नगर में 40 विद्यालय एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। उच्च प्राथमिक में मंडल में 89 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे हैं। इनमें ऊधमसिंह नगर के 15, पिथौरागढ़ के 20, नैनीताल के 12, चंपावत का एक, बागेश्वर के 16 व अल्मोड़ा के 25 स्कूल शामिल हैं। 
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कोट
स्कूलों मेें शिक्षकों की कमी का मुद्दा वास्तव में गंभीर है। लेकिन जो स्कूल एकल शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, उनमें सभी स्कूल या तो नगर क्षेत्र के हैं या फिर सुगम के स्कूल हैं। दुर्गम के अधिकांश स्कूलों में छात्र संख्या के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती की गई हैं। जूनियर हाईस्कूलों में प्राथमिक से पदोन्नति के जरिए शिक्षकों की तैनाती की जाती है। लेकिन कई शिक्षक पदोन्नति का लाभ नहीं लेते हैं। जिसकी वजह से भी शिक्षकों की कमी हो रही है। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो।
- बंदना गर्ब्याल, अपर शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुमाऊं मंडल नैनीताल।

अयारपाटा में पांच बच्चे एक टीचर के हवाले
नैनीताल। मंडल मुख्यालय नैनीताल में राजकीय प्राथमिक विद्यालय अयारपाटा एकमात्र ऐसा विद्यालय है जहां पर पांच बच्चों को एक शिक्षिका पढ़ा रही है। खास बात यह है विद्यालय में शिक्षिका के अकेले होने की वजह से न तो वह विभागीय प्रशिक्षण में जा पाती हैं और न ही स्कूल की डाक आदि देने इतना ही नहीं अगर उन्हें छुट्टी की जरूरत हो तो वह भी उन्हें नहीं मिल पाती हैं।

विभाग में हर माह डाक भेजने के लिए भोजन माता की मदद लेनी पड़ती है। विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2012 व 13 में विद्यालय में 13-13, वर्ष 2014 में 11, 2015 में 7 तथा 2016 में 5 बच्चे अध्ययनरत हैं। कक्षा एक में दो, कक्षा दो में एक, कक्षा तीन में भी एक, चार में शून्य और पांचवी कक्षा में एक बच्चा अध्ययनरत हैं। अध्यापिका तारा कविदयाल बताती हैं कि सभी बच्चे मजदूर परिवार से होने की वजह से स्कूल से दिया गया होम वर्क भी नहीं करते हैं। पढ़ाई के साथ उन्हें स्कूल में ही होमवर्क कराया जाता है। किसी दिन कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है तो भोजन माता खुद बच्चों को घर से स्कूल में लाती है और घर तक छोड़ आती है। विद्यालय का हाल व बरामदा जीर्ण शीर्ण हाल में है।
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