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हल्द्वानी: बिजली चोरी पर आम जनता को कार्रवाई का करंट, सरकारी आवासों से तो मीटर ही गायब; खुली लापरवाही की पोल

Thu, 22 Oct 2026 12:13 PM IST
Heera समीर बिसारिया/नवनीत सिंह बिष्ट

सार

हल्द्वानी कोतवाली के पास पूल्ड हाउस के सरकारी आवासों में कहीं बिजली मीटर गायब तो कहीं 16 साल पुराने बंद मीटर टंगे मिले, और कई जगह तारों पर कट लगाकर अवैध लाइन खींची गई है।
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हल्द्वानी में पूल्ड आवास परिसर में इस भवन के ग्राउंड फ्लोर के दोनों कमरों में नही लगे बिजली के मी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी का बिल बकाया हो तो कनेक्शन काटने में देर नहीं लेकिन सरकारी आवासों में कहीं मीटर गायब हैं तो कहीं 16 साल पुराने बंद मीटर टंगे हैं। इतना ही नहीं बिजली के तारों पर कट लगाकर भी लाइन खींची गई है। कोतवाली के पास बने पूल्ड हाउस में पड़ताल के दौरान सामने आईं इन तस्वीरों ने यूपीसीएल की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी। हैरानी की बात यह है कि इन आवासों में पुलिस, प्रशासन, राजस्व और कर विभाग के अधिकारी-कर्मचारी रहते हैं।

हल्द्वानी में कोतवाली के समीप पूल्ड हाउस योजना के तहत बनाए गए आवासों में से कहीं बिजली के मीटर नहीं लगे हैं तो कहीं ऐसे मीटर लगे हैं जो वर्षों पहले चलन से बाहर हो चुके हैं। कई जगह तो बिजली के तार पर कट लगाकर लाइन खींची गई है। इन आवासों में अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक को अनुमान के आधार पर यूपीसीएल बिजली का बिल भेज रहा है।

एक ही मीटर से हो रही बिलिंग

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कोतवाली परिसर के समीप ही टाइप थ्री और फोर के छह-छह आवास बने हैं। इन आवासों का आवंटन कलक्ट्रेट से होता है। अमर उजाला और संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पूल्ड आवास परिसर में विद्युत वितरण व्यवस्था की पड़ताल की तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर यूपीसीएल तक के अफसरों की कार्यप्रणाली की पोल खुल गई। पड़ताल में खुलासा हुआ कि सरकारी आवास में अलग-अलग मीटर नहीं हैं, एक ही जगह पर लगाए मीटर से बिलिंग की जा रही है। ऊर्जा निगम इससे अनभिज्ञ है। माना जा रहा है कि इससे ऊर्जा निगम को हर साल दो से ढाई लाख रुपये के राजस्व की चपत लग रही है।

 

खुलती गई लापरवाही की पोल

 

केस-1: दरवाजा खुला लेकिन मीटर बंद मिला
बुधवार दोपहर दो बजे टीम टाइप-थ्री आवास के प्रथम तल पर पहुंची। दरवाजा खटखटाने पर एक महिला बाहर आई। उसने बताया कि परिवार हाल ही में यहां शिफ्ट हुआ है और बिजली बिलिंग की जानकारी उसे नहीं है। टीम ने जब घर के बाहर लगे मीटर को देखा तो वह बंद मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि आवास में बिजली की खपत का हिसाब कैसे रखा जा रहा है और बिल किस आधार पर तैयार किया जा रहा है।

केस-2 : 16 साल पहले चलन से बाहर हुआ मीटर अब भी लगा है

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टीम परिसर के दूसरे टाइप-थ्री आवास पर पहुंची तो वहां लगा मैकेनिकल मीटर बंद मिला। बताया गया कि ऊर्जा निगम करीब 16 साल पहले ही इस तरह के मीटरों को चलन से बाहर कर चुका है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक और अब स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी आवास में पुराने मीटर का लगा होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यह आवास कलक्ट्रेट में तैनात एक कर्मचारी को आवंटित है।

 

केस-3 : पुलिस अधिकारी के आवास पर मीटर नहीं
टाइप-फोर आवास में रहने वाले एक पुलिस अधिकारी के घर पर भी टीम को बिजली मीटर नजर नहीं आया। आवास में एसी समेत बिजली से चलने वाले अन्य उपकरण मौजूद होने की जानकारी सामने आई। पड़ताल के दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि बिजली की रीडिंग एक मीटर से होती है और उसी के आधार पर बिल आता है। हालांकि, वह यह नहीं बता सका कि संबंधित मीटर कहां लगा है।

मीटर से पहले तारों में कट
पूल्ड हाउस के प्रथम तल के क्वार्टरों में लगे खराब मीटरों के अलावा बिजली के तारों में भी कई जगह कट दिखाई दिए। मौके पर दो से तीन स्थानों पर तार काटकर लाइन जोड़ने के निशान मिले।

 

38 साल पुराना कनेक्शन, अब तक नहीं बदला नाम
आफिसर्स कॉलोनी के एक आवास पर वर्ष 1988 से जुड़ा बिजली कनेक्शन अब भी एक ही कर्मचारी के नाम पर दर्ज है। एक किलोवाट के इस कनेक्शन पर 2,027 रुपये का बकाया बताया गया है। एक अन्य मामले में पूर्व पीसीएस अधिकारी का जिले से तबादला हो चुका है और उनका आवास किसी दूसरे अधिकारी को आवंटित कर दिया गया है। इसके बावजूद बिजली कनेक्शन अब भी पूर्व अधिकारी के नाम पर है।

 

14 आवास है आवंटित, अधिकतर में बिजली के मीटर नहीं
हल्द्वानी कोतवाली परिसर स्थित पूल्ड आवास में कुल 14 आवास हैं। कलक्ट्रेट से मिले आंकड़ों के अनुसार यहां आवास आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस और तहसीलदार रैंक के अधिकारी को आवंटित हैं। पड़ताल के दौरान जहां प्रशासन और पुलिस अधिकारी रह रहे हैं, इनमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के घर में अंदर और बाहर कहीं बिजली का मीटर नजर नहीं आया। पता चला कि आसपास के अधिकतर घरों में भी मीटर नहीं है। परिसर में रह रहे तहसीलदार रैंक के अधिकारी के आवास के बाहर मीटर लगा नजर आया। कलक्ट्रेट के एक कर्मचारी के कमरे के बाहर भी बंद और खराब मीटर लगा मिला। ऊर्जा निगम के सूत्रों ने बताया कि पूल्ड आवास परिसर से जिस हिसाब से आवास हैं, उस तरह बिल नहीं मिलता है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। संभावना है कि कोतवाली परिसर के कनेक्शन से भी यहां बिजली दी जा रही हो।

यहां लगे थे मीटर
पूल्ड आवास क्षेत्र में अधिकतर अधिकारी अनुमान के हिसाब से बिल दे रहे हैं, कहां, दे रहे हैं और किसे दे रहे हैं, ये वे जानते हैं या बिजली विभाग। कुल मिलाकर इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। पड़ताल में पता चला कि तहसीलदार जैसे पांच अधिकारी और कर्मचारियों के घरों पर मीटर लगे नजर आए।

यह सवाल-

1. जब हर महीने मीटर रीडर बिलिंग करने जाता है तो इसकी जानकारी यूपीसीएल के अधिकारियों को क्यों नहीं दी जाती।

2. मीडर रीडर हर आवास पर रीडिंग लेने क्यों नहीं जाता, मीटर न मिलने पर इसकी जांच पड़ताल क्यों नहीं की जाती।

3. औसतन बिजली बिलिंग का क्या मतलब है, इससे राजस्व की हानि हो रही है।

4. मीटर रीडर और ऊर्जा निगम अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी से लंबे समय से बनी इस अव्यवस्था पर किसी का ध्यान नहीं गया।

5. अब पूरा मामला सामने आने के बाद यूपीसीएल क्या कार्रवाई करेगा।

सभी डिविजनों में बिजली का लाइन लाॅस कम करने को कहा गया। अधीक्षण और अधिशासी अभियंता को स्मार्ट लगाने के निर्देश दिए हैं, कहीं गड़बड़ी है तो इसकी जांच कराई जाएगी। - शेखर त्रिपाठी, मुख्य अभियंता यूपीसीएल

 

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