हल्द्वानी। चुनाव होते हैं। व्यवस्थाएं होती हैं। प्रत्याशी जीतते हैं मगर एमबीपीजी कॉलेज के हिस्से आती है परेशानी। परेशानी इसलिए क्योंकि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हर बार एमबीपीजी कॉलेज को जिला निर्वाचन कार्यालय बनाया जाता है। कॉलेज के फर्नीचर, कंप्यूटर, शौचालय, पेयजल, बिजली आदि पर आया खर्च और इनके नुकसान की भरपाई महाविद्यालय को करनी पड़ती है। कॉलेज के कंप्यूटर आदि ले लिए जाते हैं मगर लौटाने की जरूरत नहीं समझी जाती।
राज्य गठन से पूर्व में विधानसभा और लोकसभा के लिए पीपुल्स कॉलेज को निर्वाचन कार्यालय बनाया जाता था। सुशीला तिवारी अस्पताल बनने के बाद पीपुल्स कॉलेज के बंद होने पर एमबीपीजी कॉलेज को जिला निर्वाचन कार्यालय बनाया जाता रहा है। निर्वाचन के दौरान कॉलेज का अधिग्रहण करने के बाद निर्वाचन कार्यालय अपनी सुविधा के हिसाब से यहां व्यवस्थाएं करता है जिसमें कई भवनों, महाविद्यालय की दीवारों आदि में तोड़फोड़ की जाती है।
मतपेटियां सुरक्षित रखने लिए स्ट्रांग रूम बनाए जाते हैं। मतगणना के दौरान बेरिकेडिंग की जाती है। इसमें महाविद्यालय की काफी संपत्ति का नुकसान होता है। यही नहीं पिछले चुनाव में तो महाविद्यालय के शौचालय इस कदर खराब कर दिए गए थे कि उन्हें ठीक कराने में ही लाखों रुपये खर्च करने पड़े। बिजली, पानी का जो खर्च होता, उसका भुगतान भी महाविद्यालय प्रशासन को करना होता है।
यह है हाल
हल्द्वानी। पिछले चुनाव में प्रयोग में लाए गए नौ कंप्यूटर आज तक नहीं लौटाए गए हैं। वर्तमान में फिर से आठ और कंप्यूटर ले लिए गए हैं। निर्वाचन कार्यालय पर एमबीपीजी कॉलेज प्रबंधन का पिछले चुनावों का करीब 50 लाख रुपया बकाया है लेकिन अभी तक निर्वाचन कार्यालय की ओर से एक पाई का भी भुगतान नहीं किया गया है।
छात्र निधियों का सहारा
हल्द्वानी। महाविद्यालय के पास अतिरिक्त कोई आय नहीं है और प्रशासनिक मद में भी धन नहीं मिलता है। महाविद्यालय में छात्रों से लिए गए शुल्क और छात्र निधियों से महाविद्यालय प्रशासन चुनाव बाद महाविद्यालय का रखरखाव और मरम्मत आदि का काम कराता है। इस बार भी महाविद्यालय का अधिग्रहण कर लिया गया है और पूर्व में हुए खर्च का कोई ब्योरा नहीं दिया गया है। इतने बड़े निर्वाचन को संपन्न कराने के बावजूद छात्र निधियों से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। जबकि चुनाव आयोग पर्याप्त राशि निर्वाचन के लिए देता है लेकिन महाविद्यालय प्रशासन को खर्च का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
विकल्प नहीं तलाश रहा प्रशासन
हल्द्वानी। रुद्रपुर में मंडी से निर्वाचन कार्य संपन्न कराया जाता है। कुछ अन्य शहरों में भी सरकारी संस्थानों में निर्वाचन कार्यालय बनाया जाता है। शिक्षण संस्थान को निर्वाचन कार्यालय बनाए जाने से यहां विद्यार्थियों की तीन महीने की पढ़ाई चौपट हो जाती है। इसे देखते हुए प्रशासन को किसी अन्य संस्थान से निर्वाचन का कार्य संपन्न कराना चाहिए।
निर्वाचन लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रमुख अंग है। प्रशासनिक व्यवस्था में सहयोग करना जरूरी है। जैसे निर्देश दिए जाएंगे उनका पालन किया जाएगा। हालांकि निर्वाचन बाद महाविद्यालय की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाती हैं लेकिन किसी तरह का प्रशासनिक मद नहीं होने से छात्र निधियों से राशि खर्च की जाती है।
- प्रो. बीआर पंत, प्राचार्य, एमबीपीजी कॉलेज।
एमबीपीजी कॉलेज को अस्थायी जिला निर्वाचन कार्यालय बनाया गया है। निर्वाचन संपन्न होने के बाद महाविद्यालय में टूटफूट, बिजली, पानी समेत जो भी खर्चा होगा, उसका भुगतान कर दिया जाएगा।
- धीराज गर्ब्याल, डीएम/जिला निर्वाचन अधिकारी, नैनीताल।