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सावधान! कहीं आप संक्रमित दूध तो नहीं पी रहे

Wed, 21 Jan 2015 12:12 PM IST
नवीन सक्सेना/अमर उजाला, हल्द्वानी
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दूध हर घर की जरूरत है। डाक्टर भी सलाह देते हैं कि रोजाना एक गिलास दूध पीने से शरीर स्वस्थ रहता है। चाय तो हममें ताजगी ले आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं यही पौष्टिक दूध यदि संक्रमित हो तो पेट की खराबी के साथ ही कई गंभीर बीमारियां आपको घेर सकती हैं, जिनमें सबसे खतरनाक टीबी रोग भी है।
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इसलिए जरूरी है कि यह देख लें कि आपके घर में जो दूध आ रहा है वह आपको सेहतमंद बनाएगा या बीमारी देगा। ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने कुछ पड़ताल की है, जिससे आप दूध की शुद्धता को आंक सकते हैं।

क्या होता है पाश्चुरीकृत स्टैंडराइज्ड दूध   
क्या आप जानते हैं कि किसी भी कंपनी के दूध के पैकेट पर छपे पाश्चुरीकृत स्टैंडराइज्ड क्या मतलब है। यह एक प्रोसेसिंग प्रक्रिया है। उत्तराखंड में सहकारी डेयरी फेडरेशन द्वारा दुग्ध समितियों से एकत्र कर लाए जाने वाले दूध को दुग्ध फैक्ट्री के चिलिंग प्लांट से सीधे प्रोसेसिंग प्लांट में ले जाया जाता है, जहां दूध को 78 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 16 से 20 सेकेंड तक गरम किया जाता है और उसके बाद 15 सेकेंड के अंतर पर 4 डिग्री पर लाकर ठंडा किया जाता है। इससे 78 डिग्री की हीटिंग से और एकदम 4 डिग्री पर ठंडा किए जाने पर शॉक से बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इस तरह पैकेट बंद दूध कम से कम 99 प्रतिशत बैक्टीरिया रहित होता है। इसे गरम किए बगैर भी सीधे पीया जा सकता है।
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इस तरह दूध से बीमारी पहुंचने की संभावना
दूधिए से खरीदे जाने वाले दूध और पाश्चुरीकृत दूध में क्या अंतर है, इस बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते होंगे। सुबह पांच-छह बजे दूध निकालने के बाद दूधिये को उसे दूरदराज से लाकर क्षेत्र में किसी परिवार तक पहुंचने में कम से कम 5-6 घंटे का वक्त लगता होगा। इसके अलावा अगर किसी दुधारू पशु को तपेदिक (टीबी) बीमारी है तो उसके विषाणु दूध में भी आ सकते हैं, जिसका इस्तेमाल करने से आपको भी रोग होने की संभावना रहती है। साथ ही अगर थन से दूध निकालने से पहले गाय या भैंस ने गंदे पानी में नहाया हुआ तो उसके गंदगी के बैक्टीरिया भी दूध में आ सकते हैं। इतना ही नहीं दूधिये मुनाफा कमाने के लिए तालाब या गूल का पानी भी मिला सकते हैं जो कि दूध में संक्रमण पैदा कर सकता है।

अगर किसी दुधारू पशु को टीबी है तो इस बीमारी के विषाणु दूध के माध्यम से इंसान में भी आसानी से ट्रांसफर हो सकते हैं। इसी तरह थनैला रोग के बैक्टीरिया ग्रसित दूध का इस्तेमाल करने से पेट खराब हो सकता है। इसलिए दूध को कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालना चाहिए, ताकि उसके बैक्टीरिया काफी हद तक खत्म हो सकें। वैसे पाश्चुरीकृत दूध काफी हद तक बैक्टीरिया रहित होता है।
 - डा. एलएम जोशी, पशु चिकित्सक, डेयरी फेडरेशन

टीबी बीमारी की नहीं होती जांच
दुधारू पशु में तपेदिक (टीबी) की बीमारी की जांच करने के लिए पशु अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। इसकी जांच केवल पंतनगर विश्वविद्यालय में ही होती है, इसलिए अधिकांश मामलों में पशु में इस बीमारी की जांच नहीं हो पाती। तपेदिक से ग्रसित पशु को भी इंसानों की तरह खांसी होती है।
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