भीमताल (नैनीताल)। उत्तराखंड, खासकर पहाड़ के लोगों के लिए अनजान दो विदेशों फलों की दस्तक अब नैनीताल जिले में होने जा रही है। प्रयोग यहां सफल रहा तो नाशपाती, खुबानी, प्लम, आड़ू जैसे फलों के बीच यहां दिखाई देंगे ब्लूबेरी और ड्रैगन फ्रूट से लदे पेड़। इन फलों का नाम जितना अलग है, यहां लोगों के लिए इनका स्वाद भी उतना ही जुदा। बस इंतजार है इन फलों के यहां फल जाने का। खास बात यह कि जिले में पहली बार ऐसे विदेशी फलों को लगाने की कोशिश है।
उद्देश्य है किसानों की आजीविका बढ़ाना। इसके लिए उद्यान विभाग जिले में पहली बार 10 एकड़ नाप में ब्लूबेरी और छह एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती कराने जा रहा है। खेती के लिए किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। विभाग की ओर से अभी तक ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट की खेती नहीं कराई जाती थी। 2025-26 की जिला योजना में इसे शामिल किया गया है। धनराशि स्वीकृत होने के बाद किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा। ब्लूबेरी की खेती ओखलकांडा, धारी, रामगढ़, भीमताल, बेतालघाट के पर्वतीय क्षेत्रों में कराई जाएगी। हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती होगी।
ब्लूबेरी के एक पौधे की कीमत 450 रुपये पड़ती है। लेकिन किसान को ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट की पौध में 20 प्रतिशत ही राशि देनी होगी। उन्हें उद्यान सचल केंद्रों के माध्यम से उद्यान कार्ड, भूमि संबंधित दस्तावेज, आधार कार्ड जमा करने होंगे। जिले में 60 से अधिक किसानों को बजट की उपलब्धता के आधार पर लाभ दिया जाएगा।
जिले में पहली बार 10 एकड़ में ब्लूबेरी, छह एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती कराई जाएगी। इसके लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी जिसकी कार्ययोजना बना ली गई है। - डॉ. रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी
ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट को जानिए
ब्लूबेरी, ड्रैगन फ्रूट की खेती थाइलैंड, चीन, अमेरिका आदि देशों में होती है। इसका स्वाद कसैला यानी खट्टा-मीठा होता है। इसे नीलबदरी के नाम से भी जाना जाता है। ब्लूबेरी में मौजूद फाइबर, विटामिन सी, विटामिन-के, पोटेशियम स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं। ड्रैगन फ्रूट को पिटाया या पिटाहाया भी कहा जाता है। यह हाइलोसेरियस नामक कैक्टस (नागफनी) का एक प्रकार का फल है। ड्रैगन फ्रूट में बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई पोषक तत्व और विटामिन होते हैं।