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लावारिस कुत्तों से नहीं मिला नैनीताल के लोगों को छुटकारा

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नैनीताल। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी से शासन किया। नेताओं ने जन समस्याओं को हल कराने के दावे तो किए, मगर नैनीताल में लावारिस कुत्तों के आतंक से आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि निजात नहीं दिला सका। आलम यह है कि लावारिस कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो चिंताजनक है।
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बीडी पांडे अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 में ही साढ़े तीन हजार से ज्यादा लोगों ने एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई। यहां साल में औसतन 1500 से 1800 लोग लावारिस कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। बावजूद लावारिस कुत्तों से लोगों को बचाने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई। बीडी पांडे अस्पताल के पीएमएस डॉ. केएस धामी के मुताबिक अस्पताल में रोजाना चार-पांच लोग एंटी रेबीज लगाने पहुंचते हैं।
इन जगहों पर ज्यादा खतरा
नैनीताल। नैनीताल में जगह जगह कुत्तों के झुंड होने से लोगों को आवाजाही करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रात में लावारिस कुत्तों का झुंड और ज्यादा खूंखार हो जाता है। नैनीताल में तल्लीताल डांठ, कार पार्किंग तल्लीताल, फांसी गधेरा, कलेक्ट्रेट मार्ग, टोल चुंगी, मॉल रोड, मल्लीताल पंतपार्क, चाट बाजार, बड़ा बाजार और कोतवाली के पास अक्सर आवारा कुत्तों का झुंड रहता है।
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कुत्तों के काटने से हो चुकी है मौत
नैनीताल। नैनीताल में साल 2017 में राजस्थान से घूमने आए पर्यटक की बच्ची कुत्तों के झपटने से सड़क से नीचे गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। नौ अगस्त को ओकपार्क क्षेत्र और 17 दिसंबर 2019 को मेविला कंपाउंड में कुत्तों ने बच्चे को बुरी तरह काटकर घायल कर दिया था। पांच जून 2020 को अयारपाटा निवासी मोहम्मद रिजवान के छह वर्षीय पुत्र फैजान पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। बच्चे के शरीर में 40 से 45 टांके आए थे। 10 जून 2020 को लावारिस कुत्तों ने 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मार्निंग वॉक करते समय बुरी तरह जख्मी कर दिया था।
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कुत्तों की संख्या में नियंत्रित करने के लिए बीते वर्षों में नैनीताल में 95 प्रतिशत कुत्तों का बधियाकरण कराया जा चुका है।
अशोक कुमार वर्मा, ईओ नगर पालिका नैनीताल
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