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झुलसे हुए मरीज को एक से दूसरे अस्पताल दौड़ाते रहे डॉक्टर

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प्रतीकात्मक।
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हल्द्वानी। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे चाहे जितने किए जा रहे हो, मगर स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनहीनता अक्सर देखने को मिलती है। काशीपुर निवासी झुलसा मरीज शुक्रवार को एसटीएच और बेस के बीच इलाज के लिए एक घंटे तक चक्कर काटता रहा।
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काशीपुर निवासी चंदन कुमार शुक्रवार सुबह गैस सिलिंडर के लीक होने के कारण आग की चपेट में आकर झुलस गया। काशीपुर में प्राथमिक इलाज के बाद उसे एसटीएच रेफर कर दिया गया। मरीज जब एसटीएच पहुंचा तो इमरजेंसी में इलाज के बाद उसे सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल भेज दिया। बेस अस्पताल पहुंचने पर इमरजेंसी में उसकी जांच की गई। मरीज के साथ आए लोगों से कहा गया कि मरीज 50 प्रतिशत झुलसा है और एसटीएच ले जाएं। परिजनों ने जवाब दिया कि एसटीएच से ही मरीज को लेकर आए हैं।
इमरजेंसी में मौजूद डाक्टरों ने जवाब दिया कि उनके पास झुलसे हुए मरीज का इलाज करने के लिए बर्न वार्ड नहीं है। परिजन चंदन को वापस एसटीएच लेकर गए। परिजनों का आरोप था कि मरीज तड़प रहा है उसका इलाज करने के बजाए दोनों अस्पताल रेफर करने में लगे हैं।
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इस संबंध में बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरीश लाल ने कहा कि अस्पताल में झुलसे मरीज का इलाज होता है पर ज्यादा गंभीर होने पर रेफर किया जाता है। बर्न वार्ड को आइसोलेशन वार्ड बना दिया है। साथ ही बेस अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन नहीं है। एसटीएच के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु सक्सेना ने बताया कि मरीज 50 प्रतिशत तक झुलसा हुआ है और उसकी हालत गंभीर है। मरीज अभी खतरे के बाहर नहीं है।
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