नैनीताल। चिया की ओर से मंगलवार को डीएसबी परिसर में पुश्किन फर्त्याल स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। इस दौरान नंधौर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक कुंदन कुमार (भारतीय वन सेवा) ने उत्तराखंड में वन प्रशासन की बदलती भूमिका, संरक्षण और संघर्ष को संतुलित करने पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रबंधित करना चुनौती है। उन्होंने जोर दिया कि वन विभाग अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इन तकनीकों से वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा में मदद मिल रही है। उन्होंने नंधौर अभयारण्य के उदाहरणों से समझाया। वनों के स्थायी संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है।
चिया के सचिव आशीष तिवारी ने दिवंगत डॉ. पुश्किन फर्त्याल के हिमालयी क्षेत्र में योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि डॉ. फर्त्याल ने हिमालय के सतत विकास के लिए संस्थान का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया था। इस अवसर पर चिया के अधिशासी निदेशक कुंदन बिष्ट, उपसचिव श्रुति साह, डॉ. विनीता फर्त्याल, डॉ. महिका फर्त्याल, डॉ. जीसीएस नेगी, दीपा उपाध्याय, विनीता वर्मा, नीमा रौतेला, डॉ. टीपी ध्यानी आदि रहे।